जौनपुर। शिक्षक संघ ने राजभवन को भेजा शिकायती पत्र,
प्रवेश प्रक्रिया तत्काल रोकने एवं जाँच की मांग।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सत्र 2025-26 के Ph.D. प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का घोर उल्लंघन जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रवेश परीक्षा के परिणाम एवं DRC प्रक्रिया में नौकरियों हेतु लागू रोस्टर प्रणाली को जबरन थोप दिया है, जबकि रोस्टर प्रक्रिया में ऊर्ध्वाधर (Vertical) एवं क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं होता। यह प्रक्रिया केवल सरकारी नौकरियों में लागू की जाती है, छात्रों के शैक्षणिक प्रवेश में इसका कोई स्थान नहीं है।खुद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने अपने कैंपस में चल रहे स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया में अलग एवं नियम-सम्मत आरक्षण प्रक्रिया अपनाई है, जिसमें रोस्टर का उपयोग नहीं किया जाता। लेकिन Ph.D. प्रवेश में अलग से रोस्टर लागू करना स्पष्ट पक्षपात एवं नियम-विरोधी कृत्य है। इसके अलावा महिला,भूतपूर्व सैनिक एवं दिव्यांगजन अभ्यर्थियों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं दिया गया।
प्रवेश परीक्षा स्तर पर आरक्षण देने के बाद DRC स्तर पर पुनः आरक्षण प्रदान करना दोहरे आरक्षण के रूप में पूर्णतः अवैध है।
इन अनियमितताओं से मेधावी अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित हो रहे हैं तथा आरक्षण नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।इस संबंध में संघ ने आज कुलाधिपति/राज्यपाल उत्तर प्रदेश को विस्तृत शिकायती पत्र प्रेषित किया है, जिसमें प्रवेश प्रक्रिया को तत्काल स्थगित कर निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की गई है।संघ के इकाई अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार मिश्र ने कहा है कि “विश्वविद्यालय एक ही संस्थान में दोहरी नीति कैसे अपना सकता है? कैंपस कोर्सेस में एक नियम और Ph.D. में दूसरा – यह स्पष्ट भेदभाव है। रोस्टर केवल नौकरियों के लिए है, प्रवेश के लिए नहीं। हम राजभवन से अपील करते हैं कि तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करें। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संघ बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।”संघ ने सभी प्रभावित अभ्यर्थियों, शिक्षकों एवं न्यायप्रेमी नागरिकों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।





