जमीन के विवाद में हुई हत्या का मामला, आरोपियों के घर दबिश देकर पुलिस ने की कार्रवाई
आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लाठी बरामद, सभी के खिलाफ विधिक कार्रवाई
खेतासराय (जौनपुर): क्षेत्र के रानीमऊ गांव में जमीन के विवाद को लेकर हुई मारपीट और हत्या के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो सगे भाइयों और एक महिला समेत तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, घटना में नामजद दो बाल अपचारियों को भी पुलिस ने अभिरक्षा में लिया है। गुरुवार की सुबह पुलिस टीम ने खुटहन थाना क्षेत्र के सेठुआपारा गांव में दबिश देकर यह कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों में से एक की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लाठी भी बरामद की है।
पुलिस के मुताबिक, बीते 20 अक्टूबर को रानीमऊ गांव में जमीन के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। इस दौरान मोहम्मद अकरम की मौत हो गई थी। घटना के बाद गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया था। मामले में मृतक की पत्नी नरगिस ने 21 अक्टूबर को खेतासराय थाने में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी थी।
थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार की सुबह करीब 9:15 बजे पुलिस टीम ने खुटहन थाना क्षेत्र के सेठुआपारा गांव में आरोपियों के घर दबिश दी। इस दौरान फरहान और रेहान पुत्रगण मोहम्मद वहाजुद्दीन तथा हुस्नआरा पत्नी मोहम्मद वहाजुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा घटना में नामजद दो बाल अपचारियों को भी अभिरक्षा में लिया गया।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी फरहान की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त एक लाठी बरामद की गई है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया गया, जबकि दोनों बाल अपचारियों के संबंध में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का इस मुकदमे के अतिरिक्त कोई अन्य आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, उपनिरीक्षक शैलेंद्र कुमार राय, हेड कांस्टेबल राजकुमार यादव, अंबिका यादव, कांस्टेबल आशुतोष तिवारी, गौरव तोमर तथा महिला कांस्टेबल प्रियंका प्रजापति और प्रियंका गुप्ता शामिल रहीं।
नवयुवक दुर्गा पूजा समिति ने पुरानी बाजार में कराया विशाल भंडारा, सेवा में जुटे रहे कार्यकर्ता
खेतासराय (जौनपुर): कस्बे के पुरानी बाजार में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित विशाल भंडारे में गुरुवार को आस्था, सेवा और समर्पण का अनूठा संगम देखने को मिला। मां दुर्गा के जयकारों के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भक्ति के रंग में रंगे आयोजन स्थल पर अमीर-गरीब और ऊंच-नीच का भेद मिटता नजर आया। श्रद्धालुओं की सेवा में समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरी तन्मयता से जुटे रहे।
भंडारे में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवाओं ने कतारबद्ध होकर मां का प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच कार्यकर्ता व्यवस्था संभालने से लेकर प्रसाद परोसने तक की जिम्मेदारी निभाते रहे। आयोजन स्थल पर गूंजते माता रानी के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
समिति के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने बताया कि भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। उन्होंने कहा कि भूखे को भोजन कराना और जरूरतमंदों की सेवा करना ही सच्ची मानवता और ईश्वर की आराधना है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं।
भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। एक ओर श्रद्धालु मां का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे थे, तो दूसरी ओर कार्यकर्ता सेवा को ही अपना सौभाग्य मानकर जिम्मेदारियां निभा रहे थे। देर तक प्रसाद वितरण का सिलसिला चलता रहा।
इस दौरान रत्न बरनवाल, राधेश्याम सेठ, घनश्याम सेठ, भरत सेठ, शनि सेठ, मुकेश बरनवाल, संदीप सोनी, रामआसरे साहू, शिवलाल मोदनवाल, अशोक बरनवाल, प्रमोद बरनवाल और कंचन सेठ समेत अन्य कार्यकर्ता व्यवस्था में जुटे रहे।
जरूरतमंदों की सहायता का संकल्प, श्रवण बाधित लोगों को मिला सहायक उपकरणों का लाभ
जौनपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के 62वें जन्मदिवस के अवसर पर जौनपुर में पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह के नेतृत्व में श्रवण बाधित लोगों को 62 कान की मशीनें वितरित की गईं। इस पहल का उद्देश्य श्रवण संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध कराना तथा उनके दैनिक जीवन को अधिक सहज बनाने में सहयोग देना रहा।
इस अवसर पर कृपाशंकर सिंह ने कहा की जरूरतमंदों की सहायता और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। जन्मदिवस जैसे विशेष अवसरों को सेवा और जनकल्याण के कार्यों से जोड़कर समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि श्रवण बाधित लोगों के लिए कान की मशीनें उपयोगी सहायक उपकरण हैं। इनके माध्यम से सुनने में कठिनाई का सामना कर रहे लोगों को बातचीत करने, परिवार एवं समाज के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया। जरूरतमंद लोगों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने तथा उन्हें सामाजिक जीवन में अधिक सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मौके पर भाजपा प्रवक्ता ओमप्रकाश सिंह,ब्लॉक प्रमुख राहुल सिंह, विनय सिंह, मुकेश सिंह, रत्नाकर सिंह, धर्मेंद्र यादव, श्याम राज सिंह, महामंत्री पियूष गुप्ता, उपाध्यक्ष पर्मेंद्र चौहान, रामकेवल यादव, सुधीर सिंह, जिला दिव्यांगजन अधिकारी राजेश नागर, डॉ राजेश सिंह, सहित सैकड़ो लोग रहे!
वरिष्ठता सूची एवं पदोन्नति प्रक्रिया में विसंगतियों के निराकरण हेतु शिक्षकों ने उठाई न्यायोचित मांग।
जनपद जौनपुर में 29334 गणित/विज्ञान भर्ती के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति से संबंधित प्रकरण को लेकर शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आदरणीय श्री समीर कुमार जी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा तथा अपनी मांगों से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
शिक्षकों ने प्रमुखता से मांग की कि वरिष्ठता सूची तैयार करने एवं पदोन्नति की प्रक्रिया में 29334 गणित/विज्ञान भर्ती से संबंधित शासनादेशों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षकों को नियमानुसार उनका न्यायोचित अधिकार प्राप्त हो सके।
प्रतिनिधिमंडल ने पदोन्नति प्रक्रिया में उत्पन्न विसंगतियों को दूर करने, वरिष्ठता सूची में नियमों के अनुरूप सुधार करने तथा सभी संबंधित शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी एवं न्यायसंगत पदोन्नति सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष इंदु प्रकाश यादव के नेतृत्व में शशि राय, अनुज पांडेय, पंकज सिंह, मनीष यादव, विनोद यादव, अमरेंद्र सिंह, रघुराज यादव, अनिल कुमार गुप्ता, अरविंद यादव, अरविंद सिंह, सुबोध श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षक साथी उपस्थित रहे।
शोभायात्रा देखने गई 19 वर्षीय युवती की बेरहमी से पिटाई, गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर
खेतासराय (जौनपुर): दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की खुशियों के बीच बुधवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने उत्सव के माहौल में सनसनी फैला दी। थाना क्षेत्र के चकशाहग्यास गांव में प्रतिमा विसर्जन की शोभायात्रा देखने गई 19 वर्षीय युवती को मामूली विवाद में कथित तौर पर लात-घूंसों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि युवती को इस कदर पीटा गया कि उसकी हालत बिगड़ गई। उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने पर चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के चकशाहग्यास गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद पुत्र स्वर्गीय शोभा बिन्द ने बुधवार को गांव के लोग दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे थे। उनकी 19 वर्षीय पुत्री सुलेखा बिन्द भी अन्य ग्रामीणों की तरह शोभायात्रा देखने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान भीड़ में किसी लड़की से शरीर छू जाने को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामूली बात ने हिंसक रूप ले लिया।
पीड़िता के पिता का आरोप है कि इसी विवाद को लेकर कुछ युवतियों और युवकों ने उनकी बेटी को घेर लिया और लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। अचानक हुए हमले में सुलेखा गंभीर रूप से घायल हो गई। जिस बेटी को परिजनों ने खुशी-खुशी मां दुर्गा की विदाई देखने भेजा था, उसे घायल अवस्था में अस्पताल ले जाना पड़ा।
घटना के बाद परिजन घायल युवती को आनन-फानन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। महिला सहित आधा दर्जन नामजद सहित अन्य तीन-चार अज्ञात युवकों पर मारपीट का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है।
जय मां विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति का पांचवां सम्मान समारोह आयोजित, पत्रकारों समेत दर्जनों विभूतियां सम्मानित
लकी ड्रॉ में जीविका जायसवाल को मिली एलईडी टीवी, पांच विजेताओं को दिए गए पुरस्कार
खेतासराय (जौनपुर): जय मां विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति की ओर से मंगलवार को पांचवें सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवियों, पत्रकारों और आठ स्वैच्छिक रक्तदाताओं समेत दर्जनों लोगों को सम्मानित किया गया। रक्तदाताओं के सम्मान के दौरान सेवा और मानवता का संदेश दिया गया। वहीं लकी ड्रॉ में पांच भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा जिला महामंत्री अजय सिंह ने कहा कि समाज के प्रति समर्पण और निस्वार्थ सेवा भाव रखने वालों का सम्मान करना ही सच्ची सामाजिक चेतना है। समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। कोई रक्तदान कर जीवन बचाने में योगदान देता है, तो कोई गरीबों और असहायों की मदद करता है। वहीं पत्रकार अपनी लेखनी से समाज की समस्याओं को जिम्मेदारों तक पहुंचाते हैं। ऐसे लोगों का सम्मान करने से दूसरों को भी समाजसेवा की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना सराहनीय पहल है। इससे समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
समारोह में आठ स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सम्मान विशेष आकर्षण रहा। वक्ताओं ने कहा कि रक्तदान महादान है। जरूरत के समय किया गया रक्तदान किसी परिवार की खुशियां बचाने का माध्यम बन सकता है। रक्तदाता जाति और धर्म से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करते हैं। युवाओं को भी रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
समिति के अध्यक्ष शांतिभूषण मिश्रा ने कहा कि मां विंध्यवासिनी की आराधना के साथ मानवता की सेवा करना समिति का प्रमुख उद्देश्य है। धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनसे समाज में सेवा, सहयोग और सद्भाव का संदेश जाए। उन्होंने कहा कि समिति लगातार पांच वर्षों से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन कर रही है। आगे भी यह परंपरा जारी रहेगी।
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सुनील यादव मम्मन, समाजसेवी सतीश यादव प्रिंस, भाजपा जिला मंत्री धर्मेंद्र मिश्रा, राजकेसर पाल, कृष्ण कुमार जायसवाल, मंडल अध्यक्ष अजय यादव, उपेंद्र नाथ मिश्रा और प्रशांत सिंह दीपक समेत अन्य अतिथियों ने समिति के प्रयासों की सराहना की।
सम्मान समारोह के दौरान आयोजित लकी ड्रॉ में पांच विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्रथम पुरस्कार के रूप में जीविका जायसवाल को एलईडी टीवी मिली। द्वितीय पुरस्कार जय प्रकाश प्रजापति को मिक्सर, तृतीय पुरस्कार शिवम गुप्ता को फर्राटा पंखा, चतुर्थ पुरस्कार डॉ. आजम खान को गैस चूल्हा तथा पंचम पुरस्कार सबीर इमरान को प्रेस (इस्त्री) प्रदान की गई। विजेताओं के नाम घोषित होते ही लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय, कपूर चन्द्र जायसवाल, पप्पू पटवा, अमित जायसवाल, दीपक सोनी, प्रिंस गुप्ता, शनि गुप्ता, आशीष गुप्ता, अनूप गुप्ता, राविंश गुप्ता विक्की, राकेश गुप्ता, अभिषेक बरनवाल, अंश विश्वकर्मा, अनुभव सोनी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन समिति के संरक्षक मनीष गुप्ता ने किया। उन्होंने अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार जताया।
मनेछा गांव में युवा दम्पती की संदिग्ध मौत से सनसनी, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप
एक-दूजे के साथ जिंदगी बिताने का देखा था सपना, महज एक वर्ष में ही दोनों की मौत से उठे कई सवाल
खेतासराय (जौनपुर): जिस प्रेम कहानी की शुरुआत एक-दूसरे के साथ सात जन्मों तक जीने के वादों से हुई थी, उसका महज एक वर्ष बाद ऐसा दर्दनाक अंत होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। बुधवार की शाम खेतासराय थाना क्षेत्र के मनेछा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब प्रेम विवाह करने वाले युवा दम्पती के शव एक ही घर में फंदे से लटकते मिले। जिंदगी भर साथ निभाने का सपना संजोने वाले पति-पत्नी की एक साथ संदिग्ध मौत ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर, विवाहिता के मायके पक्ष ने हत्या कर शव गायब करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जानकारी के अनुसार मनेछा गांव निवासी चिंता प्रसाद के पुत्र उपदेश गौतम (22 वर्ष) ने करीब एक वर्ष पूर्व बद्दोपुर गांव निवासी पूजा (21 वर्ष) से प्रेम विवाह किया था। बताया जाता है कि दोनों एक-दूसरे से बेहद प्रेम करते थे। प्रेम संबंध को विवाह के बंधन में बदलकर दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया था। शादी के बाद दोनों साथ रह रहे थे और उनके संबंध भी अच्छे बताए जा रहे हैं। लेकिन बुधवार की शाम अचानक सामने आई घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया।
बुधवार की शाम करीब साढ़े छह बजे उपदेश और पूजा के शव घर में छत पर करकट लगाने के लिए लगे लोहे के पाइप के सहारे दुपट्टे से लटकते पाए गए। एक ही स्थान पर पति-पत्नी के शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। जिसने भी घटना के बारे में सुना, वह सन्न रह गया। महज 22 और 21 वर्ष की उम्र में दोनों की एक साथ मौत ने पूरे घटनाक्रम को रहस्यमय बना दिया है।
मायके पक्ष के आरोपों ने बढ़ाई घटना की गंभीरता
घटना ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पूजा के मायके पक्ष ने हत्या की आशंका जताते हुए गंभीर आरोप लगाए। मायके वालों ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना देकर हत्या करने और शव गायब करने का आरोप लगाया। हालांकि, दोनों के शव घर में फंदे से लटकते पाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनमें दो युवा जिंदगियों का एक साथ अंत हो गया? यह आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
एक साल पहले रचाई थी शादी, अब एक साथ मिली मौत की खबर
प्रेम-विवाह के महज एक वर्ष के भीतर हुई इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। जिस उम्र में युवा दम्पती अपने भविष्य की बुनियाद रखते हैं, उसी उम्र में उपदेश और पूजा की जिंदगी का इस तरह अंत हो जाना कई सवाल छोड़ गया है। दोनों के बीच अच्छे संबंध होने की बात सामने आने से मौत की परिस्थितियां और भी उलझी हुई नजर आ रही हैं।
सूचना मिलते ही खेतासराय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस घटना से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
पीछे छूट गए सवाल, जवाब का इंतजार
मनेछा गांव की इस घटना ने एक प्रेम कहानी के दर्दनाक अंत के साथ कई सवाल भी छोड़ दिए हैं। आखिर एक वर्ष पहले साथ जीने का फैसला करने वाले उपदेश और पूजा की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि दोनों मृत पाए गए? मायके पक्ष के आरोपों में कितनी सच्चाई है? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच पर टिके हैं। फिलहाल दो युवा जिंदगियों की असमय मौत से गांव में शोक और स्तब्धता का माहौल है।
कहीं हल चलाता किसान, तो कहीं धान रोपती महिलाएं; मां के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
खेतासराय(जौनपुर): आधुनिकता की चकाचौंध में जहां गांवों की पुरानी संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही हैं, वहीं खेतासराय क्षेत्र के आर्यनगर गोरारी में सजा दुर्गा पूजा पंडाल लोगों को अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और ग्रामीण जीवन की सादगी से रूबरू करा रहा है। श्री-श्री दुर्गा स्वतंत्र युवक दुर्गा मंदिर समिति की ओर से गांव की थीम पर तैयार किया गया भव्य पंडाल इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आस्था के साथ ग्रामीण संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो लोगों को भावविभोर कर रहा है।
पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मां दुर्गा के दर्शन से पहले श्रद्धालुओं को गांव की पूरी जीवनशैली से गुजरने का अनुभव हो रहा है। प्रवेश द्वार से कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है, मानो कोई व्यक्ति शहर की भागदौड़ छोड़कर अपने बचपन के गांव लौट आया हो।
कहीं खेत में हल चलाता किसान अन्नदाता के परिश्रम की कहानी बयां कर रहा है, तो कहीं धान रोपती महिला ग्रामीण जीवन के संघर्ष और मेहनत की तस्वीर पेश कर रही है। खेत की रखवाली करता किसान अन्न के एक-एक दाने की अहमियत समझा रहा है। वहीं फल और सब्जी बेचते दुकानदार, पौधों की देखभाल करता माली, किराना स्टोर तथा ताड़ के पेड़ से ताड़ी उतारता व्यक्ति गांव के पारंपरिक व्यवसायों की झलक दिखा रहे हैं।
पंडाल में गांव के सरपंच, यूनियन बैंक की शाखा और श्रृंगार करती महिला की झांकी भी सजाई गई है। इन दृश्यों के माध्यम से ग्रामीण समाज की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवनशैली को एक ही परिसर में समेटने का प्रयास किया गया है।
सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य वह है, जब श्रद्धालु गांव की इन झांकियों से गुजरते हुए अंत में मां शेरावाली के भव्य दरबार तक पहुंचते हैं। यहां विराजमान मां दुर्गा के दर्शन कर भक्त श्रद्धा से शीश नवाते हैं। ग्रामीण संस्कृति की सजीव झलक और देवी मां के प्रति अटूट आस्था का यह संगम पंडाल को विशेष पहचान दे रहा है।
समिति ने पंडाल के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि गांव केवल खेत-खलिहान और कच्ची पगडंडियों का नाम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कार, परंपराओं और मेहनतकश समाज की आत्मा हैं। जिस किसान के पसीने से देश का पेट भरता है, उसी अन्नदाता के संघर्ष को मां दुर्गा के दरबार तक पहुंचने वाले मार्ग में सम्मानजनक स्थान दिया गया है।
समिति के अध्यक्ष राहुल गौड़, उपाध्यक्ष राहुल गुप्ता और कोषाध्यक्ष लल्ला गुप्ता के नेतृत्व में आयोजन को भव्य स्वरूप दिया गया है। इसमें प्रांजल बरनवाल, शुभम गुप्ता, अभिषेक साहू और प्रमोद साहू सहित अन्य सदस्य सहयोग कर रहे हैं।
आर्यनगर गोरारी का यह पंडाल केवल देवी आराधना का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी से जुड़ी यादों, किसानों के परिश्रम और विलुप्त होती ग्रामीण परंपराओं को सहेजने का एक भावनात्मक प्रयास भी बन गया है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ उस ग्रामीण भारत की झलक भी देख रहे हैं, जिसकी मेहनत और संस्कृति में देश की असली पहचान बसती है।
छह सूत्री मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का एलान
खेतासराय (जौनपुर): प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोंधी की आशा बहु कल्याण समिति एवं आशा बहु कर्मचारी और आशा संगिनियों ने मंगलवार को छह सूत्री मांगों को लेकर स्वास्थ्य केंद्र मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन चिकित्साधिकारी डॉ. सूर्य प्रकाश यादव को ज्ञापन सौंपा।
आशा बहुओं और आशा संगिनियों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई बार मांगों को उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने से उन्हें कार्य बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
इस दौरान आशा बहुओं और आशा संगिनियों ने अपनी छह सूत्री मांग जिसमे शासकीय कर्मचारी का दर्जा, न्यूतम वेतन 1800 हज़ार, समाजिक सुरक्षा, उचित मानदेय, प्रोत्साहन राशि में दोगुनी राशि आशा घर स्वास्थ्य केन्द्र मुख्यालय पर सुरक्षा की गारंटी सहित लम्बित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। जिसमे संगिनियों की 26 हज़ार वेतन की मांग की। धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से कांति पाठक, पूनम सिंह, नगीना सिंह, उषा यादव, अमिता राजभर, उर्मिला,रेनू यादव, फूलमत्ती, संगीता, शकुंतला, गायत्री, रूपा देवी, गीता, उषा, रेखा, किरन, दुर्गावती, फूलममी, नगमा खातून, अनीता व अमरीका समेत आदि शामिल रही।
संगठन की तपिश में तपकर निखरे ईशान जायसवाल ‘राम’, संघर्ष और वफादारी को मिला सियासी मुकाम
सियासत की चकाचौंध से दूर संगठन की बुनियाद मजबूत करने वाले ईशान बने भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष
जिम्मेदारियों की लंबी फेहरिस्त और संगठन के प्रति बेदाग समर्पण ने दिलाई नई पहचान
खेतासराय (जौनपुर): सियासत की दुनिया में कुर्सियां तो बहुतों को नसीब होती हैं, लेकिन संगठन की धूल फांककर, संघर्ष की तपिश सहकर और वर्षों तक बिना किसी बड़े ओहदे की परवाह किए अपनी वफादारी निभाने वालों को जब मुकाम मिलता है, तो वह महज एक नियुक्ति नहीं, बल्कि बरसों की तपस्या का सिला बन जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है जनपद जौनपुर में तहसील शाहगंज की सियासी जमीन से निकलकर जिला स्तर पर अपनी पहचान कायम करने वाले ईशान जायसवाल (राम) की।
भारतीय जनता पार्टी ने ईशान जायसवाल (राम) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी ताजपोशी के साथ ही शाहगंज से लेकर जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल है। इस नियुक्ति को संगठन के प्रति उनकी वर्षों की निष्ठा, जमीनी सक्रियता और सियासी संघर्ष के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।
ईशान की इस उपलब्धि के पीछे न तो कोई रातोंरात मिली शोहरत है और न ही सियासत की आसान राह। इसके पीछे संगठन की शाखाओं से लेकर चुनावी मैदान तक का लंबा सफर, जिम्मेदारियों का बोझ और कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान कायम रखने की लगातार जद्दोजहद रही है।
शाखा की अनुशासन भरी जमीन से शुरू हुआ सियासी सफर
शाहगंज नगर निवासी ईशान जायसवाल (राम) का राजनीतिक और सामाजिक सफर उन दिनों शुरू हुआ, जब उनकी पहचान किसी बड़े पद से नहीं, बल्कि संगठन के एक सक्रिय और अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में थी।
वर्ष 2009 से 2014 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की श्रीराम शाखा एवं शिवाजी शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वर्ष 2014 से 2017 तक संघ में कार्यवाह का दायित्व संभाला।
यही वह दौर था, जब संगठनात्मक अनुशासन, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और सामाजिक सरोकारों ने उनके सार्वजनिक जीवन की बुनियाद मजबूत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े विभिन्न मोर्चों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया।
न ओहदे की जल्दबाजी, न जिम्मेदारियों से किनारा
ईशान जायसवाल का संगठनात्मक सफर कई अहम जिम्मेदारियों से होकर गुजरा है। भाजपा युवा मोर्चा में मंडल मंत्री, मंडल महामंत्री और विधानसभा प्रभारी जैसे पदों पर काम करने के साथ ही उन्होंने भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई।
वर्ष 2019 से 2021 तक भाजपा युवा मोर्चा में जिला सह प्रमुख, सेवा भारती का दायित्व संभाला। वर्ष 2021 से भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा उत्तर प्रदेश में प्रदेश सोशल मीडिया सदस्य के रूप में सक्रिय रहे।
वर्ष 2025 में उन्हें भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ का जिला संयोजक बनाया गया। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन की युवा इकाई में प्रदेश महामंत्री के रूप में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई।
इन तमाम जिम्मेदारियों के बीच उनकी सियासी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता की बनी, जिसने संगठन के अलग-अलग मोर्चों पर काम करते हुए अपनी सक्रियता बरकरार रखी।
चुनावी रणभूमि में भी निभाई अहम जिम्मेदारियां
ईशान जायसवाल का सियासी सफर केवल संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं रहा। चुनावी मैदान में भी पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता युवा मोर्चा के विधानसभा प्रभारी और भाजपा के शक्ति केंद्र प्रभारी के रूप में उन्होंने काम किया। वर्ष 2024 के मछलीशहर लोकसभा चुनाव में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इसी चुनाव में सोशल मीडिया के क्षेत्र संयोजक के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में संगठन की ओर से विधानसभा प्रभारी के तौर पर काम करने का अवसर मिला। इन जिम्मेदारियों के दौरान चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े अनुभव उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा बने।
वर्षों की खामोश मेहनत को मिली पहचान
सियासत का एक दस्तूर है कि यहां अक्सर मंच पर दिखाई देने वाले चेहरे सुर्खियां बटोर लेते हैं, जबकि पर्दे के पीछे संगठन की बुनियाद मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत को पहचान मिलने में लंबा वक्त लग जाता है। ईशान जायसवाल की जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। छात्र और सामाजिक गतिविधियों से शुरू हुआ उनका सफर शाखा, मंडल, विधानसभा, जिला और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियों से गुजरते हुए अब एक नए मुकाम तक पहुंचा है। उनके समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक पद मिलने की खुशी नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सफर की उपलब्धि है, जिसमें वर्षों की मेहनत, उम्मीदें और संगठन के प्रति समर्पण जुड़ा रहा है।
नई जिम्मेदारी मिलने पर बोले ईशान, पद नहीं, कार्यकर्ताओं का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी
भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद ईशान जायसवाल (राम) ने संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और पिछड़ा वर्ग मोर्चा को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता पर जो भरोसा जताया है, वह मेरे लिए सम्मान के साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। संगठन ने मुझे पहचान दी, कार्यकर्ताओं ने हौसला दिया और वरिष्ठ नेतृत्व ने हमेशा मार्गदर्शन किया। मैं जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, उसके पीछे उन तमाम कार्यकर्ताओं की मेहनत है, जो बिना किसी पद की अपेक्षा किए दिन-रात संगठन के लिए काम करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, मेरे लिए जिलाध्यक्ष का पद कोई मंजिल नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष के एक नए सफर की शुरुआत है। मेरी कोशिश होगी कि जिले के अंतिम छोर पर खड़े कार्यकर्ता को भी सम्मान मिले और पिछड़े वर्ग के हर समाज तक संगठन की पहुंच मजबूत हो। सबको साथ लेकर चलना और नेतृत्व के विश्वास पर खरा उतरना मेरी प्राथमिकता रहेगी।
अब इम्तिहान सिर्फ संगठन चलाने का नहीं, दिलों को जोड़ने का भी
जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही ईशान जायसवाल के सामने चुनौतियों का नया दौर शुरू हो गया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग मोर्चा की सक्रियता बढ़ाना, नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ना और पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभवों का सम्मान करते हुए सामंजस्य कायम करना उनके लिए अहम होगा। पिछड़े वर्ग के विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बढ़ाना, सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना भी उनकी नई जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण कसौटी होगी।
संगठन में पद मिलने से राजनीतिक कद जरूर बढ़ता है, लेकिन असली नेतृत्व की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने साथ कितने कार्यकर्ताओं का भरोसा और सम्मान लेकर आगे बढ़ता है।
शाहगंज की सियासी फिजा में खुशी, कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को मिले नए पंख
ईशान जायसवाल (राम) की नियुक्ति से शाहगंज के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है। स्थानीय स्तर पर उनकी ताजपोशी को संगठन में सक्रिय रहने वाले युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। एक ऐसे दौर में, जब सियासत में पहचान और पद हासिल करने की होड़ तेज है, ईशान का लंबा संगठनात्मक सफर यह संदेश देता है कि निरंतर सक्रियता और जिम्मेदारियों के निर्वहन से भी राजनीतिक नेतृत्व की राह तैयार की जा सकती है। सियासत की असली कहानी सिर्फ उन लोगों की नहीं होती, जिनके नाम के आगे बड़े ओहदे लिखे जाते हैं। कहानी उनकी भी होती है, जो बरसों तक संगठन का झंडा थामे रहते हैं, मुश्किल वक्त में कदम पीछे नहीं खींचते और अपनी बारी आने तक मेहनत का दामन नहीं छोड़ते।
ईशान जायसवाल (राम) के लिए जिलाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचना एक अहम उपलब्धि है, लेकिन अब उनकी असली आजमाइश शुरू होगी। क्योंकि सियासत में ओहदा मिल जाना कामयाबी का एक पड़ाव है, मगर कार्यकर्ताओं के दिलों में जगह बनाना और उनके भरोसे पर खरा उतरना ही नेतृत्व की असली पहचान है।