जनपद जौनपुर में 23 बाल विवाह रोके गए, 19 मुसहर परिवारों से जुड़े
खेतासराय(जौनपुर): बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध खेतासराय थाने परिसर में थाना प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को नगर सहित क्षेत्र के आस-पास संभ्रातजनों के साथ मिलकर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही साथ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़ कर सहभागिता की।
कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए बाल संरक्षण अधिकारी चंदन राय ने बताया कि ह्यूमन कमेटी के प्रयासों से हाल ही में जनपद में 23 बाल विवाह रोके गए, जिनमें से 19 विवाह मुसहर परिवारों से संबंधित थे। गौरतलब है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की शुरुआत वर्ष 1929 में अंग्रेजी शासन के दौरान शारदा एक्ट के रूप में हुई थी। आज़ादी के बाद 1976 में भारत सरकार द्वारा इसमें संशोधन किया गया। इसके बाद वर्ष 2006 में पुनः संशोधन कर बाल विवाह को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया। कानून के अनुसार, इस अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करने वाले सभी व्यक्ति अपराधी माने जाते हैं।
इसी क्रम में थाना बरसठी क्षेत्र में एक बाल विवाह के मामले में मुकदमा भी दर्ज किया गया है, जो कानून के सख्त क्रियान्वयन का संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि बच्चे की आयु का निर्धारण हाई स्कूल के अंक प्रमाण पत्र के माध्यम से किया जा सकता है। वहीं, जन्म के 21 दिन बाद बनाया गया जन्म प्रमाण पत्र आयु निर्धारण के लिए मान्य माना जाता है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 1098 चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन पर बाल विवाह, बाल श्रम एवं खोए हुए बच्चों से संबंधित मामलों में संपर्क किया जा सकता है। चाइल्ड लाइन के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा एवं देख-रेख सुनिश्चित की जाती है।
प्रशासन एवं सामाजिक संगठनों का मानना है कि जब तक समाज से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकने के लिए शपथ दिलाया गया और हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रधान सन्दीप मौर्या, मनीष मौर्या, अंजू बिन्द, मोहित बिन्द, हरेंद्र यादव, बिंदु मौर्या समेत आदि लोग उपस्थित रहे।




