22 दिसंबर एक अद्भुत भौगोलिक दिन ,डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
jaunpur : अंतरिक्ष से देखने पर नीले हरे रंग की हमारी धरती घूमते हुए पूरे ब्रह्मांड का अद्भुत ग्रह है क्योंकि अभी तक एक भी ग्रह पृथ्वी की तरह खोज नहीं जा सका है जो जीव जंतु हवा पानी और वनस्पतियों से युक्त हो धरती सचमुच अपने सौरमंडल का ही नहीं अपनी आकाशगंगा का भी सबसे अद्भुत ग्रह है और यहां पर घटने वाली भौगोलिक घटनाएं भी परम विचित्र हैं अपनी आकाशगंगा के दो खराब सूर्य के बीच कई हजार खराब ग्रह नक्षत्र में धरती पर ही जीवन विद्यमान है ऐसी ही एक अद्भुत भौगोलिक घटना 22 दिसंबर को घटित होती है जब सबसे बड़ी रात और सबसे छोटा दिन होता है l

डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि
पृथ्वी बाहर से देखने पर गोल दिखती है लेकिन यह पूरी तरह गोल नहीं है बल्कि उत्तरी दक्षिणी ध्रुव पर नंगी की तरह हल्की चपटी है और यह अपने अक्ष पर 23.50अंश झुकी हुई है इसीलिए धरती पर दिन-रात बराबर नहीं रहता है क्योंकि धरती पर सूर्य की किरणें सामान नहीं पड़ती है इसलिए धरती पर दिन-रात अंधेरा उजाला बराबर नहीं रहता है
पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने के कारण मौसम और ऋतु में बदलता है जबकि पृथ्वी के अपने अक्ष पर लट्टू की तरह घूमने के कारण दिन और रात होते हैं इसी परिक्रमण और परिभ्रमण के कारण सूर्य पूर्व में उगता हुआ और पश्चिम में डूबता हुआ दिखाई देता है
22 दिसंबर को उत्तरी गोलार्ध में पड़ता है और सबसे छोटा दिन होता है जबकि सबसे बड़ी रात होती है जब सूर्य मकर संक्रांति करता है तब मकर संक्रांति के दिन 15 जनवरी के आसपास उत्तरी गोलार्ध में दिन बाद होने लगता है और रात धीरे-धीरे छोटी होने लगती है इसलिए उत्तरी गोलार्ध में नवंबर से लेकर फरवरी तक घनघोर जाना पड़ता है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में इस समय गर्मी की ऋतु होती हैं इसीलिए दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अमेरिका और आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड में इस समय जाड़े में गर्मी के रितु चल रही है
इसी प्रकार 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है इसके बाद धीरे-धीरे सूर्य दक्षिणायन हो जाता है और उत्तरी गोलार्ध में वर्षा और उसके बाद जाड़े की ऋतु आने लगती है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में इस समय जाड़े का मौसम शुरू हो जाता है इस प्रकार अप्रैल में जून जुलाई में घनघोर गर्मी पड़ती है
इसके भी खरीद 21 मार्च और 23 सितंबर ऐसा समय है जब सारी धरती पर दिन-रात बराबर होते हैं और सर्दी गर्मी भी बराबर होती है इसलिए सितंबर अक्टूबर में और फरवरी मार्च में सारी दुनिया में और भारत में भी मौसम सुहावना और बसंत का होता है यह सभी धरती के अपने अक्ष पर झुकी होने पूरी तरह से गोल नहीं होने और परिक्रमण और परिभ्रमण के कारण होता है
एक बात और है कि ठंड में जैसे-जैसे उत्तरी ध्रुव की ओर जाते हैं वैसे-वैसे दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगती है भारत के दक्षिणी भागों में और विषुवत वृत्त पर 12 घंटे के दिन 12 घंटे का रात होता है जबकि मध्य भारत जौनपुर और आसपास दिसंबर में लगभग 14 घंटे की रात और 10 घंटे का दिन होता है कश्मीर और उसके उत्तरी भागों में और चीन तथा अरब देशों में इस समय 8 घंटे का रात और 16 घंटे की रात होता है जबकि 66 अंश उत्तरी अक्षांश पर केवल रात होती है और उत्तरी ध्रुव पर 6 महीने की रात होती है जबकि इस समय दक्षिणी ध्रुव पर 6 महीने का दिन होता है ऐसा माना जाता है कि विश्व काव्य रामायण का भीषण धुरंधर महायोद्धा कुंभकरण उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर बारी-बारी से 6 महीने सोया करता था
इस प्रकार धरती के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर 6 महीने के दिन और 6 महीने की रात होती है यहां 6 महीने सूर्य डूबा रहता है और गर्मी में 6 महीने रात में भी सूर्य निकल रहता है फिनलैंड नार्वे जहां पर महीना का दिन होता है उसका दृश्य देखने लोग जाया करते हैं यहां पर रंग-बिरंगे प्रकाश की किरणें फैल जाते हैं जिनको मेरु प्रभा कहते हैं धरती पर यह अद्भुत भौगोलिक घटनाएं 22 दिसंबर 21 जून 23 सितंबर और 21 मार्च का दिन अद्भुत भौगोलिक घटना बना देती हैं





