अल मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहकर कर रही पढ़ाई,भारत सरकार से सुरक्षित वतन वापसी की गुहार
खेतासराय(जौनपुर): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इसराइल–ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने विदेश में अध्ययनरत भारतीय छात्रों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच वहां रह रहे छात्र-छात्राएं दहशत के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। क्षेत्र के बिस्वा तालुका रुधौली निवासी 23 वर्षीय छात्रा बीनू फातिमा भी इन्हीं छात्रों में शामिल हैं, जो दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) हासिल करने के लिए दो वर्ष पूर्व ईरान गई थीं।
बीनू फातिमा, काजिम हुसैन की पुत्री हैं और वर्तमान में अल मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के इस्तिहान (एसतिहान) परिसर में जाकेरा (परास्नातक) की छात्रा हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सभी छात्राओं को कैंपस से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। छात्राएं विश्वविद्यालय के हॉस्टल में ही रहकर स्थिति सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रही हैं।
परिजनों के अनुसार, इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान के कारण छात्रा से नियमित संपर्क संभव नहीं हो पा रहा है। कभी-कभी ही नेट के माध्यम से संक्षिप्त बातचीत हो पाती है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ जाती है। पिता काजिम हुसैन और माता हसीन बानो ने बताया कि हर पल मन आशंकाओं से घिरा रहता है। समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर हमलों की तस्वीरें देखकर वे बेहद व्यथित हैं।
परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आवश्यक होने पर उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि सरकार को दूतावास स्तर पर पहल कर छात्रों से नियमित संपर्क स्थापित करना चाहिए, ताकि परिवारों को राहत मिल सके। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र की बेटी विदेश में संकट के बीच फंसी है, ऐसे में प्रशासन और केंद्र सरकार को शीघ्र कदम उठाने चाहिए। गांव और आसपास के इलाकों में छात्रा की सकुशल वापसी के लिए दुआओं का सिलसिला जारी है।





