जौनपुर लोकसभा सीट पर क्या बसपा का खेल खराब करेगी भीम आर्मी?

जौनपुर लोकसभा सीट पर इस बार क्षेत्रीय पार्टियां भरेंगी दम ।


जौनपुर। पूर्वांचल की हॉट सीट माने जाने वाली सीटों में से एक जौनपुर लोकसभा की सीट भी है। जहां पर तरह तरह के कयासों के बाद बीजेपी ने कृपा शंकर सिंह को टिकट दिया तो जिले के अन्य धुरंधरों के माथे पर लकीरें खींच गई। इसके बाद ज़िला इकाई की बीजेपी टीम कृपा शंकर सिंह के साथ प्रचार प्रसार में जुट गई। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने भी बाबू सिंह सिंह कुशवाहा को टिकट देकर मैदान में उतार दिया जिसका समाजवादियों ने जमकर विरोध किया। समाजवादी पार्टी की जिला इकाई के मुताबिक जौनपुर में ही उम्दा प्रत्याशियों के रहते हुए बाहर से प्रत्यासी को क्यों लाया जा रहा है वो भी जिसके उपर एनएचआरएम घोटाले का आरोप लग चुका है। दो योद्धा तो मैदान में थे ही कि, इसी दौरान बसपा सुप्रीमों मायावती ने धोबी पछाड़ चाल चलते हुए धनंजय सिंह की पत्नी श्री कला रेड्डी को टिकट देकर जौनपुर सीट की लड़ाई में जबरदस्त इंट्री मारी है।

वही दूसरी तरफ जनपद के बहुजन समाज पार्टी के पुराने नेता, कार्यकर्ता जौनपुर की सीट को लेकर नाराज है। कुछ बसपा के मूल वोटर इस समय मानमर्दन करने के लिए तैयार बैठे है सूत्रों की माने तो चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की भीम आर्मी इस बार के चुनाव में बसपा के वोट को डायवर्ड कर सकते है।

चाय चर्चा के दौरान स्थानीय लोगो की बाते सुनने से ये पता चलता है कि, लोकसभा चुनाव 2024 में जौनपुर सीट पर जबरदस्त टक्कर देखने को मिलेगी। एक तरफ बीजेपी लड़ाई में अव्वल मानी जा रही थी लेकिन श्री कला रेड्डी के आने के बाद जौनपुर लोकसभा सीट पर पुनः त्रिकोणीय मुकाबले का शिकार बन गई। श्री कला रेड्डी को टिकट मिलने की वजह से जौनपुर की राजनीति में उथल पुथल मच गया।अब बीजेपी को अपने विकास कार्यों के दम पर चुनाव में पकड़ बनाए रखनी होगी।वही पर बाबू सिंह कुशवाहा को लोग तीसरे नंबर के खिलाड़ी मानने लगे हैं। जबकि पहले दूसरे पर बीजेपी और बसपा की लड़ाई मानी जाने लगी है।

जिससे ये कहा जाने लगा है कि, जौनपुर लोकसभा का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर आ गया है।भाजपा ने वहाँ पैराशूट कैंडिडेट दिया है। कृपाशंकर सिंह को लग रहा था कि, जाति और “मोदीजीतकीगारंटी” के दम पर आसानी से सीट निकल जाएगी। रणनीतिकारों को भी लग रहा था कि धनंजय सिंह के जेल जाने की वजह से चुनाव ठंडा पड़ जाएगा। लंबे इंतज़ार के बाद सपा से बाबू सिंह कुशवाहा प्रत्याशी बने। जिन पर एनएचआरएम के दाग़ अभी भी पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। इसी बीच बसपा ने धनंजय सिंह की पत्नी श्री कला रेड्डी को वहाँ से चुनाव मैदान में उतार कर लड़ाई त्रिकोणीय और मज़ेदार बना दिया है।

अब बारी है मतदाताओं की, मतदाताओं को भी पार्टी द्वारा किए गए चुनावी वादो से संबंधित सवाल उनके प्रत्याशियों से किया जाना चाहिए। सवाल में मतदाता ये पूछे कि, जो चुनावी वादा उनकी पार्टी द्वारा किया गया है वो किस प्रकार से तैयार हुआ और उसमे कितनी लागत आएगी। इसके अलावा ये भी पूछे कि, इसमें खर्च होने वाला पैसा कहा से आयेगा। जिस पार्टी के समर्थक सही तरीके से जवाब दे सके उन्हें ही वोट करे अन्यथा सिर्फ़ वादे सुनकर वोट करना अत्यंत नुकसानदायक होता है। इन्ही कमियों की वजह से तमाम पीएम देने वाले उत्तर प्रदेश के लोग आज भी रोजगार के लिए अन्य प्रांतों में भटक रहे हैं जो प्रदेश के राजनेताओ के लिए शर्म की बात है।


हा एक बात और ये हैं कि, मतदान अवश्य करें और पास पड़ोसियों को भी मतदान करने के लिए प्रेरित करे और लोकतंत्र के लिए एक अच्छे नेता का चुनाव कर देश के विकास में अपना योगदान दें।(ए के तिवारी पत्रकार TOC जौनपुर )

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