Homeउत्तर प्रदेशजौनपुरगांव की संस्कृति से सजा दुर्गा पंडाल बना आकर्षण का केंद्र

गांव की संस्कृति से सजा दुर्गा पंडाल बना आकर्षण का केंद्र

कहीं हल चलाता किसान, तो कहीं धान रोपती महिलाएं; मां के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

खेतासराय(जौनपुर): आधुनिकता की चकाचौंध में जहां गांवों की पुरानी संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही हैं, वहीं खेतासराय क्षेत्र के आर्यनगर गोरारी में सजा दुर्गा पूजा पंडाल लोगों को अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और ग्रामीण जीवन की सादगी से रूबरू करा रहा है। श्री-श्री दुर्गा स्वतंत्र युवक दुर्गा मंदिर समिति की ओर से गांव की थीम पर तैयार किया गया भव्य पंडाल इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आस्था के साथ ग्रामीण संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो लोगों को भावविभोर कर रहा है।

पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मां दुर्गा के दर्शन से पहले श्रद्धालुओं को गांव की पूरी जीवनशैली से गुजरने का अनुभव हो रहा है। प्रवेश द्वार से कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है, मानो कोई व्यक्ति शहर की भागदौड़ छोड़कर अपने बचपन के गांव लौट आया हो।

कहीं खेत में हल चलाता किसान अन्नदाता के परिश्रम की कहानी बयां कर रहा है, तो कहीं धान रोपती महिला ग्रामीण जीवन के संघर्ष और मेहनत की तस्वीर पेश कर रही है। खेत की रखवाली करता किसान अन्न के एक-एक दाने की अहमियत समझा रहा है। वहीं फल और सब्जी बेचते दुकानदार, पौधों की देखभाल करता माली, किराना स्टोर तथा ताड़ के पेड़ से ताड़ी उतारता व्यक्ति गांव के पारंपरिक व्यवसायों की झलक दिखा रहे हैं।

पंडाल में गांव के सरपंच, यूनियन बैंक की शाखा और श्रृंगार करती महिला की झांकी भी सजाई गई है। इन दृश्यों के माध्यम से ग्रामीण समाज की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवनशैली को एक ही परिसर में समेटने का प्रयास किया गया है।

सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य वह है, जब श्रद्धालु गांव की इन झांकियों से गुजरते हुए अंत में मां शेरावाली के भव्य दरबार तक पहुंचते हैं। यहां विराजमान मां दुर्गा के दर्शन कर भक्त श्रद्धा से शीश नवाते हैं। ग्रामीण संस्कृति की सजीव झलक और देवी मां के प्रति अटूट आस्था का यह संगम पंडाल को विशेष पहचान दे रहा है।

समिति ने पंडाल के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि गांव केवल खेत-खलिहान और कच्ची पगडंडियों का नाम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कार, परंपराओं और मेहनतकश समाज की आत्मा हैं। जिस किसान के पसीने से देश का पेट भरता है, उसी अन्नदाता के संघर्ष को मां दुर्गा के दरबार तक पहुंचने वाले मार्ग में सम्मानजनक स्थान दिया गया है।

समिति के अध्यक्ष राहुल गौड़, उपाध्यक्ष राहुल गुप्ता और कोषाध्यक्ष लल्ला गुप्ता के नेतृत्व में आयोजन को भव्य स्वरूप दिया गया है। इसमें प्रांजल बरनवाल, शुभम गुप्ता, अभिषेक साहू और प्रमोद साहू सहित अन्य सदस्य सहयोग कर रहे हैं।

आर्यनगर गोरारी का यह पंडाल केवल देवी आराधना का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी से जुड़ी यादों, किसानों के परिश्रम और विलुप्त होती ग्रामीण परंपराओं को सहेजने का एक भावनात्मक प्रयास भी बन गया है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ उस ग्रामीण भारत की झलक भी देख रहे हैं, जिसकी मेहनत और संस्कृति में देश की असली पहचान बसती है।

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