डिप्थीरिया से बचाव को लेकर स्कूलों में शुरू हुआ टीकाकरण अभियान
खेतासराय (जौनपुर) डिप्थीरिया जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार से स्कूलों में विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। यह अभियान 10 मई तक चलाया जाएगा, जिसके तहत कक्षा 5 और 10 के बच्चों को टीडी (टेटनस-डिप्थीरिया) वैक्सीन लगाई जा रही है।
अभियान के पहले दिन विकासखण्ड शाहगंज सोंधी ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल 959 बच्चों का टीकाकरण किया गया। यह अभियान राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को समय पर आवश्यक वैक्सीन उपलब्ध कराना है, जिससे वे संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सूर्य प्रकाश यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 39 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में एक प्रशिक्षित एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) के साथ आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकत्री की भी तैनाती की गई है, जो बच्चों के टीकाकरण और अभिभावकों को जागरूक करने में सहयोग कर रही हैं।
डॉ. यादव ने विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से अपील की कि वे इस जनहितकारी अभियान में पूर्ण सहयोग करें ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक टीके पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि टीडी वैक्सीन न केवल डिप्थीरिया बल्कि टेटनस जैसी बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करती है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। अभियान के दौरान स्कूलों में स्वास्थ्य टीमों द्वारा बच्चों को वैक्सीन लगवाने के बाद जरूरी देखरेख भी की जा रही है। इसके साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि भविष्य में भी वे बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
मृतक आत्माओं को दी श्रद्धांजलि, आतंकवाद के खिलाफ उठी एकजुट आवाज़
जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति के बैनर तले निकला कैंडल मार्च
खेतासराय (जौनपुर) 24 अप्रैल 2025:- पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हाल ही में पाक परस्त आतंकवादियों द्वारा किए गए निर्दोष श्रद्धालुओं के नरसंहार से देशभर में आक्रोश की लहर है। इस अमानवीय कृत्य के विरोध में तथा दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से गुरुवार को शाम खेतासराय नगर में एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया गया।
यह मार्च जय माँ विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति के बैनर तले शाम करीब 6 बजे गोलाबाजार मोड़ के पास समिति के कार्यकर्ता समेत अन्य लोगों भारी संख्या में एकत्र हो गए। जहाँ से कैंडल मार्च आरम्भ होकर संकट मोचन मंदिर, मुख्य मार्ग, चौराहा, खुटहन रोड, पुरानी बाजार रोड होते हुए पुनः उक्त स्थल पर आकर समाप्त हुआ।
मार्च के समापन पर दो मिनट का मौन रखकर मृतकों की आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई। इस दौरान भारत माता की जय, वन्दे मातरम्, आतंकवाद मुर्दाबाद, निर्दोषों के हत्यारों को फाँसी दो जैसे गगनभेदी नारे लगाकर उपस्थित जनसमूह ने आतंकवाद के प्रति अपना रोष प्रकट किया।
इस दौरान मनीष (धर्मरक्षक) ने केंद्र सरकार से आतंकियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की। साथ ही, देश की अखंडता एवं सुरक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा यह मात्र श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारतवासी अब आतंक के विरुद्ध एक स्वर में खड़े है। निर्दोषों की हत्या का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
कैंडल मार्च में उपेंद्र नाथ मिश्रा (मण्डल अध्यक्ष खेतासराय), डॉ. अमलेंद्र गुप्ता, शांतिभूषण मिश्रा, संजय विश्वकर्मा (उद्योग व्यापार मण्डल नगर अध्यक्ष), धर्मचंद्र गुप्ता, जगदंबा प्रसाद पांडे, डॉ. गजेंद्र पांडे, कपूरचंद जायसवाल, कृष्ण मुरारी मौर्य, अवधेश पांडे, विजय बरनवाल, रॉबिंस गुप्ता, आदर्श श्रीवास्तव, राहुल बरनवाल, शुभम जायसवाल, प्रदीप सोनी, सोनू बिंद सहित अनेक समाजसेवी, युवा कार्यकर्ता और नगरवासी उपस्थित रहे।
पीयू में पहलगाम आतंकी हमले के मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सरस्वती सदन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने शोक सभा का आयोजन किया, दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इस घटना से पूरे देशवासियों को गहरा दुःख हुआ है। इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। इस अवसर पर कुलसचिव महेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक विनोद कुमार सिंह, डीआर अमृत लाल, बबिता सिंह, प्रो. मानस पाण्डेय, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. राकेश यादव, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नन्द किशोर सिंह, महामंत्री रमेश यादव समेत अन्य उपस्थित रहे.
इसी क्रम में विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा भी श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम किया गया। इसके साथ ही संकाय भवन से विश्वविद्यालय गेट तक शांति मार्च निकला गया। शांति मार्च में शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए और घटना की निंदा की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ.शशिकांत यादव ने किया। शांति मार्च में प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. राम नारायण, डॉ. एस पी तिवारी, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ सुनील कुमार, डॉ. अवधेश मौर्य, डॉ. नितेश जायसवाल, प्रो. प्रमोद कुमार यादव, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. अश्वनी कुमार यादव एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं शामिल हुई।
मौसम:2दिन शादी विवाह मांगलिक कार्य करने वाले सावधान रहे
भारत में संसदीय आवश्यकता और न्यायिक सर्वोच्चता की लड़ाई -डॉ दिलीप कुमार सिंह डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर
भारत का संविधान लिखित है आकार की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा संविधान है और दुनिया के हर संविधान से कुछ न कुछ उधार लेकर इस विराट संविधान का निर्माण किया गया है जो दो वर्ष से अधिक समय में तैयार हुआ है इसकी प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर थे जब की संविधान सभा के अध्यक्ष भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे इस संविधान के निर्माण में हर क्षेत्र के दिग्गज लोगों ने भाग लिया था
भारत के संविधान निर्माण के समय ही यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया था कि संविधान के आधारभूत ढांचे में मूलभूत परिवर्तन नहीं किया जा सकता है और मूल अधिकारों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है इसके साथ ही साथ यह भी कहा गया था कि संसद पूरी तरह से सर्वोच्च रहेगी क्योंकि यह जनता के द्वारा चुनी गई है और लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी होती है बहुत दिनों तक यह विवाद चला रहा कि भारत में कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका में कौन श्रेष्ठ है
इस बात को स्पष्ट करते हुए पूरी तरह से संविधान की प्रस्तावना में कहा गया था कि हम भारत के लोग अर्थात जो भारत के लोग हैं जो वहां की जनता है वही कार्यपालिका व्यवस्थापिका और न्यायपालिका के साथ-साथ संविधान की भी आधारभूत शक्ति है ना तो कार्यपालिका न तो न्यायपालिका न तो विधायक का श्रेष्ठ है बल्कि सबसे श्रेष्ठ संविधान है क्योंकि सारे तंत्र इसी से अपनी शक्तियां प्राप्त करते हैं और क्योंकि संविधान अपनी शक्ति खुद ही जनता से प्राप्त करती है इसलिए भारत की जनता सबसे श्रेष्ठ है यही इसमें पूरी तरह से स्पष्ट रूप से कहा भी गया है शक्तियों का पृथक्करण सिद्धांत प्रतिपादित करके पूरी तरह से बता दिया गया है कि तीनों तंत्र अलग हैं अपने में स्वतंत्र हैं और अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोच्च हैं लेकिन क्योंकि संसद को कानून बनाने की और संविधान में संशोधन की अपार शक्तियां प्राप्त हैं इसलिए बिना किसी संदेह के संसद ही सर्वोच्च है लेकिन इस बात पर स्वतंत्रता के बाद से आज तक की लड़ाई लगातार जारी है और मजे की बात यह है कि कभी कार्यपालिका की लड़ाई ना तो न्यायपालिका से हुई और ना तो कार्यपालिका की लड़ाई आज तक संसद से हुई है
अगर देखा जाए तो न्यायपालिका की सर्वोच्चता और संसदीय परम सत्ता के मूल में दोनों तंत्र की अति महत्वाकांक्षा और एक दूसरे के ऊपर हावी होने का असंवैधानिक प्रयास है लेकिन इधर के वर्षों में न्यायिक सक्रियता इतनी अधिक बढ़ गई है कि न्यायपालिका सारी शक्तियां अपने हाथ में लेकर कार्यपालिका व्यवस्थापिका को जिस तरह आदेश निर्देश दे रहे हैं और देश के सर्वोच्च सत्ता संविधान के संरक्षक राष्ट्रपति और राज्यपाल के प्रति उसका हाल में दिया गया जो निर्देश है वह उसको अति महत्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित करने का एक असाधारण प्रयास है
सांसद और न्यायपालिका का टकराव कोई नई बात नहीं है उनके मूल में उच्च न्यायालय में संविधान का अनुच्छेद 226 227 और सर्वोच्च न्यायालय के मूल में अनुच्छेद 32 और 136 142 और 368 अनुच्छेद हैं जिनका मनमानव व्याख्या करके इस समय न्यायपालिका अपने सर्वोच्च स्थान पर पहुंच गए हैं और विधायक का तथा कार्यपालिका उसके आगे असहाय दिख रही है इस बात को इस तरह से समझा जा सकता है कि जिस तरह से सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा यह निर्णय दिया गया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अगर किसी विधेयक पर 3 महीने तक निर्णय नहीं लेते तो वह विधायक अपने आप पारित माना जाएगा अगर संसद भी इसी तरह प्रस्ताव पारित करके न्यायपालिका के 6 करोड़ से अधिक लंबित मुकदमों का यह निर्देश दे दे कि अगर यह मुकदमे 1 वर्ष में निर्णीत नहीं हो गए तो इन्हें अपने आप निर्णीत माना जाएगा तब आप समझ लीजिए कितनी भयंकर और टकराव वाली संवैधानिक स्थिति पैदा होगी
अब हम कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण विवादों का चल अनावरण करते हुए उनकी चर्चा करेंगे जिसमें समय-समय पर विधायक प्रभु सत्ता और न्यायिक सर्वोचना की लड़ाई हुई है लेकिन अंतिम स्पष्ट रूप से किसी की प्रभावी सर्वोच्चता और प्रभु सत्ता अभी तक सिद्ध नहीं हो सकी है।
भारत के इतिहास के सांसद और न्यायपालिका के बीच के सर्वाधिक चर्चित मामले न्यायिक नियुक्ति आयोग गोलकनाथ नाम बिहार राज्य मिनर्वा मिल्स बनाम बिहार राज्य केशवानंद भारती का विवाद है जिनकी इस समय खूब चर्चा हो रही है इस पर न्यायपालिका ने क्या कहा वह भी आपको हम बताते हैं
केशवानंद भारती विवाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित किया गया कि संसद को संविधान के मूल ढांचे को बदलने का अधिकार नहीं है लेकिन यही सर्वोच्च न्यायालय तक बिल्कुल मौन रह गया जब संविधान की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया तथा संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को ही बदल दिया गया और उसमें जबरदस्ती समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष जैसे शब्द जोड़कर संविधान का मजाक बनाया गया जबकि प्रस्तावना संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जिस संविधान की कुंजी या संविधान की आत्मा भी कहा जाता है उसे समय सर्वोच्च न्यायालय पूरी तरह से खामोश रहा जब इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल लगाया गया और न्यायाधीशों की वरिष्ठता को जानबूझकर अंडे देखा करते हुए जूनियर न्यायाधीश को भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और और जैसे चर्चित मामलों में सांसद ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की गरिमा तारतार कर दिया 42वां और 44 वां संशोधन की न्यायपालिका के मुंह पर एक जोरदार तमाचा से भी बढ़कर है अगर उसे समय न्यायपालिका की सक्रियता आज की तरह आई होती तो लोग बिना कहे ही उसको अपना समर्थन दे देते।
इसी तरह गोलकनाथ विवाद मिनर्वा मिल्स विवाद राष्ट्रीय न्यायिक आयोग विवाद और अन्य बड़े-बड़े बिंदुओं पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह कहा गया कि संविधान की व्याख्या करने और उसकी सुरक्षा करने का एकमात्र अधिकार केवल और केवल सर्वोच्च न्यायालय को है और इसकी सुरक्षा और व्याख्या के लिए सर्वोच्च न्यायालय कोई भी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है शाहबानो प्रकरण में भी ऐसा ही कुछ था जब स्वर्गीय राजीव गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की ऐसी की तैसी करते हुए उसको पलटकर संविधान संशोधन कर दिया केजरीवाल के मामले में भी ऐसा कुछ हुआ था आपातकाल लागू करते समय इंदिरा गांधी ने संविधान और जजों की एक भी रत्ती भर परवाह नहीं किया और जो कुछ भी मन में आया करती चली गई नेहरू इंदिरा ममता बनर्जी मुलायम सिंह यादव और इस तरह के अन्य लोगों के सामने सर्वोच्च न्यायालय की एक न चली और उसे समय तक पूरी तरह से संसद की प्रमुख सत्ता कायम हो चुकी थी लेकिन जब से मोदी जी ने कार्यभार ग्रहण किया है तब से न्यायिक सक्रियता अपने चरण पर पहुंच गए और लगभग हर बिंदुओं पर संसदीय सर्वोच्चता को चोट पहुंचाई जा रही है कॉलेजियम सिस्टम पर न्यायिक नियुक्ति विधेयक को खारिज करना है इसका उत्तम उदाहरण है इसी तरह वह संशोधन बिल पर भी सर्वोच्च न्यायालय की दिशा संसद से टकराव के बिंदु पर पहुंच गई है।
अब एक बार फिर से सांसद और सर्वोच्च न्यायालय पर वापस आते हैं संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संविधान की व्याख्या करने और उसकी सुरक्षा करने का अधिकार अन्य रूप से सर्वोच्च न्यायालय को है और संसद के द्वारा बनाए गए कानूनी की समीक्षा का भी उसे अधिकार है और अगर वह संविधान के मूल ढांचे का अतिक्रमण कर रहे हैं तो सर्वोच्च न्यायालय उसे पर उचित दिशा निर्देश दे सकता है जबकि संसद का काम कानून बनाने के साथ-साथ संविधान के संशोधन का भी है और संविधान संशोधन का एकमात्र अधिकार संसद के पास है सर्वोच्च न्यायालय के पास नहीं है इसी तरह संसद को न्यायपालिका के सभी प्रकार के निर्णय की समीक्षा का असीमित अधिकार है अगर वह संतुष्ट नहीं है तो किसी भी निर्णय में उचित प्रक्रिया और उचित बहुमत सेवा संशोधन कर सकती है इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय को एक और अधिकार संसद के ऊपर प्राप्त है जिसको न्यायिक पुनर्विलोकन कहा जाता है संविधान के मूल ढांचे के विधायकों के विरुद्ध अधिकार प्राप्त हैं इस प्रकार से भी स्पष्ट है कि संसदीय सर्वोच्चता न्यायिक सर्वोच्चता के ऊपर है केशवानंद भारती गोलकनाथ मिनर्वा मिल्स जैसे विवादों में कहा गया की किसी भी कानून से संविधान के आधारभूत ढांचे में परिवर्तन नहीं किया जा सकता और न ही मूल अधिकारों को रोका जा सकता है इसमें एक और बिंदु दबाया जब मिनर्वा मिल्स में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि संसद के पास संविधान संशोधन की असीमित शक्ति है जो धारा 368 में संसद को प्राप्त है
सांसद और सर्वोच्च न्यायालय में टकराव का सबसे बड़ा बिंदु कॉलेजियम सिस्टम है जिसमें पहले से कार्यरत मुख्य न्यायाधीश कर न्यायाधीशों के साथमिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि अगला न्यायाधीश कौन-कौन होगा जिसे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में नियुक्त किया जाए यह अधिकार संविधान का नहीं है स्वयं न्यायपालिका द्वारा बनाया गया है और इतना मजबूत हो गया है कि अब कॉलेजियम सिस्टम में किसी भी कार्यपालिका या सांसद का हस्तक्षेप नहीं रह गया है
इस संदर्भ में एक और बात को स्पष्ट कर देना है यद्यपि भारत के संविधान में दुनिया के लगभग हर संविधान से कुछ ना कुछ लिया गया है लेकिन भारत का अधिकांश संविधान ब्रिटेन और अमेरिका के द्वारा लिया गया है अमेरिका में न्यायपालिका की सर्वोच्चता है जबकि ग्रेट ब्रिटेन में वहां की संसद सर्वोच्च है क्योंकि वहां कोई लिखित कानून लिखित संविधान है ही नहीं इस प्रकार भारत में गणतंत्र और लोकतंत्र की मिली जुली पद्धति लोकतांत्रिक गणराज्य की पद्धति बनाई गई जो अधिक सफल नहीं हो पा रही है इससे देश आधा तीतर आधा बटेर जैसी स्थिति में आ गया है दुर्भाग्य बस जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने-अपने अनुसार न्यायपालिका संविधान और संसद के बारे में लेख लिखा करते हैं
इस प्रक्रिया में एक और बात को जान लेना आवश्यक है की न्यायपालिका अर्थात सर्वोच्च न्यायालय और संसद का संबंध बहुत कुछ दोनों पदों के शीर्ष पर बैठे हुए मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री पर भी निर्भर करता है जो कमजोर एवं निर्णय लेने में प्रभावी नहीं रहता वह दूसरे के ऊपर प्रभावी हो जाता है जिस प्रकार नेहरू और इंदिरा गांधी थे अगर वैसा कोई व्यक्ति होता तो यह सब नौबत नहीं आती जो आज पैदा हुई है दूसरी बात संबंधित दल का प्रधानमंत्री कितने बहुमत में है यह भी सर्वोच्च न्यायालय को प्रभावित करता है इस समय मोदी सरकार प्रभावी बहुमत में नहीं है इसलिए भी अधिकतर निर्णय उनके विरुद्ध जा रहे हैं देश को यह अनुभव हो रहा है कि कुछ ना कुछ मूलभूत परेशानी है जिसकी कीमत देश की जनता को चुकानी पड़ रही है
वैसे भी संसद को एक निश्चित बहुमत के द्वारा किसी भी न्यायाधीश को हटाने काअधिकार है जबकि न्यायालय के पास यह शक्ति नहीं है इस संदर्भ में न्यायाधीश कर्णन रामास्वामी और यशवंत वर्मा जी सहित अनेक न्यायाधीशों के चाल चरित्र से न्यायपालिका की साख को गहरा धक्का पहुंचा है और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को दिवस होकर यह कहना पड़ा है कि देश के न्यायालय राष्ट्रपति को आदेश निर्देश जारी नहीं कर सकते जो बिल्कुल उचित है
इस संदर्भ में निशिकांत दुबे और सैकड़ो अन्य लोगों के वक्तव्य को भी अन्य देखा नहीं किया जा सकता देश या जानना चाहता है कि आखिर तीस्ता सीतलवाड़ गिरीश सोमैया गोधरा और बेस्ट बेकरी कांड बुलडोजर और मुर्शिदाबाद बंगाल कांड पालघर और पहलगाम जैसे अनगिनत मामलों में सर्वोच्च न्यायालय का एक साथ दोहरा व्यवहार स्पष्ट रूप से देखने को क्यों मिल रहा है ।
न्यायपालिका के अंदर बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो नहीं चलना चाहिए जिस पर अधिक लिखना उचित नहीं है लेकिन जो वादकारी थके हारे पीढ़ियों से मुकदमा लड़ रहे हैं वह अधिकारियों से और उनकी स्थिति से सर्वोच्च न्यायालय और उच्च
न्यायपालिका के अंदर बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो नहीं चलना चाहिए जिस पर अधिक लिखना उचित नहीं है लेकिन जो वादकारी थके हारे पीढ़ियों से मुकदमा लड़ रहे हैं वह अधिकारियों से और उनकी स्थिति से सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को अवगत होकर उसे पर प्रभावित कार्यवाही अवश्य करनी चाहिए इसके साथ ही न्यायिक तंत्र में फैले हुए भ्रष्टाचार घूसखोरी और चाटुकारिता की भावना को भी प्रभावी ढंग से समाप्त करना होगा इसमें अपने संपत्ति की घोषणा करना भी एक उदारता पूर्ण और प्रभावी कदम होगा और नए परिसर में हर प्रकार के अन्य अत्याचार को रोकना न्यायिक तंत्र की सबसे बड़ी और पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और इस बारे में एक व्यापक सर्वेक्षण भी होना चाहिए क्योंकि न्यायपालिका में फैले हुए मुकदमों में करोड़ों लोग फंसे हुए हैं और यह देश की प्रगति में बहुत बड़ी बाधा सिद्ध हो रहा है क्योंकि प्रतिदिन करोड़ों लोग केवल मुकदमों के संदर्भ में न्यायालय आते हैं और जाते हैं और उतना मानव श्रम बिल्कुल बेकार हो जाता है यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ मुकदमे सप्ताह और महीना में कैसे निर्णीत हो जाते हैं और क्यों उन्हें लंबित पड़े हुए करोड़ों करोड़ों मुकदमों में नहीं अपनाया जा सकता है।
न्यायपालिका को भी गहराई से और निष्पक्ष रूप से बिना कोई अन्यथा लिए विचार विमर्श करना चाहिए क्योंकि यह टकराव किसी भी प्रकार से न्यायपालिका संसद या देश के हित में नहीं है जबकि न्यायपालिका यह अच्छी तरह जानती है की लोकतांत्रिक प्रणाली में यहां तक की गणतंत्र में भी संसद ही सर्वोच्च होती है वह कानून बना सकती है उसमें संशोधन कर सकती है नए कानून ला सकती है न्यायाधीशों को हटा सकती है और उनकी नियुक्ति में भी प्रभावी भूमिका निभा सकती है और नियुक्त हो जाने पर भी राष्ट्रपति के पास उसे रोके जाने का ब्रह्मास्त्र मौजूद है सबसे अच्छा यह होता कि न्यायपालिका अपना संपूर्ण मस्तिष्क का प्रयोग करते हुए अपने लंबित सारे मुकदमों को निपटाकर देश और दुनिया के सामने एक अद्भुत प्रतिमान स्थापित करती तो बाकी सारे बिंदु
अपने आप में नगण्य हो जाते कहीं ना कहीं कश्मीर मैं कश्मीरियों के साथ सामूहिक हत्या सामूहिक बलात्कार और पलायन दिल्ली में सिखों की हत्या पालघर और मुर्शिदाबाद तथा बंगाल जैसे कांड केराना और अभी बिल्कुल हाल में घाटा हुआ पहलगाम का कांड चीख चीखकर कोई अन्य कहानी कह रहा है और देशवासी न्यायिक सक्रियता के दोहरेपन पर हतप्रभ हैं न्याय प्रणाली और न्यायाधीश निश्चित रूप से सदैव सबसे सम्मानित और सबसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं लेकिन उनको भी इस तंत्र की गरिमा और साख को बहाल रखना चाहिए संसद को भी न्यायपालिका की सर्वोच्च गरिमा का ध्यान रखते हुए ही कोई कदम उठाना चाहिए और सांसद तथा न्यायपालिका को यह मानकर काम करना चाहिए कि सारे देशवासी उनके घर के सदस्य जैसे हैं इसके बाद कोई गलत कदम उठाने की संभावना ही नहीं रह जाएगी l
जौनपुर – उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र ने अवगत कराया है कि वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति जनजाति सबप्लान के व्यक्तियों को स्वरोजगार युक्त बनाये जाने हेतु सामूहिक प्रशिक्षण दिया जाना है।
इस योजना के अन्तर्गत 04 माह का प्रथम एवं द्वितीय बैच (45-45 अभ्यर्थियो) को प्रशिक्षण दिया जायेगा। जिसमें एक माह का सैद्धान्तिक एवं 03 माह का व्यवहारिक प्रशिक्षण होगा। अभ्यर्थी की आयु 18 वर्ष से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान रू0 1250.00 प्रतिमाह अभ्यार्थियों का मानदेय के रूप में दिया जायेगा। इच्छुक अभ्यर्थी अपना आवेदन पर आन लाइन आवेदन 25 जुलाई कर सकते है।
जौनपुर। जिले के होटल के सभागार में एक दिवसीय नेशनल सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय-“विभिन्न स्तर पर शिक्षण अधिगम और शोध में एनईपी 2020 का निहितार्थ, प्रभाव एवं उपयोगिता” रहा।
मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार चतुर्वेदी, पूर्व प्रोवीसी, वीर टिकेंद्रजीत विश्वविद्यालय इंफाल (मणिपुर) एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुरूआत किया। सेमिनार में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों से चौदह शोधकर्ताओं ने प्रत्यक्ष पेपर प्रजेंटेशन दिया। आफलाइन मोड में छिहत्तर शिक्षा प्रेमी तथा आनलाइन मोड मे सैकड़ों लोगों ने सहभागिता की।
मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार चतुर्वेदी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा जिसे पालने की भाषा भी कहते हैं, उसी में प्रारंभिक शिक्षा दिया जाए तभी आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर होगा क्योंकि बच्चे शुरुआत में मां के हाव से सीखते हैं। बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वैसे वैसे माता पिता, परिवार, पड़ोस आदि के सम्पर्क में आने लगता है ।
इससे पूर्व लालसाहब यादव पूर्व एआरपी बख्शा ने कहा कि यह नेशनल सेमिनार ज्वलंत मुद्दा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर केंद्रित है।
विशिष्ट अतिथि एनएसएस के पूर्व समन्वयक प्रो. राकेश कुमार यादव ने कहा कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में शिक्षा ही मानवीय जीवन के पुनरुत्थान का आधार रही है और हैं भी। शिक्षा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देश काल एवं परिस्थितियों के अनुसार करवट बदलती रहती है। इक्कीसवीं सदी की मांग है कि अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के साथ साथ मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा एवं राष्ट्रीय भाषा को महत्व दिया जाएं। प्राचीन धर्मग्रंथो वेद, पुराण, उपनिषद, शिलालेखों, अन्य साहित्य आदि के व्यावहारिक पहलुओं को जानना आवश्यक है इसीलिए विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परंपरागत साहित्य को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
पूर्व प्राचार्य एसडीटीटीसी, हजारीबाग झारखंड ने कहा कि शिक्षा का शाब्दिक अर्थ सीखना और सीखाना होता है इसके साथ एक और अर्थ यह है कि शिक्षा बालक की जन्मजात शक्तियों को बाहर निकालकर उसे भविष्य के तैयार करती है।
असि. प्रो. डॉ. योगेश कुमार ने कहा कि शिक्षा साध्य है साधन नहीं। शिक्षा वास्तव में उपभोग है । यही कारण है कि शिक्षा के विभिन्न अंगों जैसे छात्र, शिक्षक, पाठ्यक्रम, तकनीकी आदि के मूल स्वरूप बदल गया है। वर्तमान शिक्षा बाल केंद्रित है सभी शिक्षकों, अभिभावकों, माता पिता को बच्चों की जन्मजात शक्तियों को बाहर निकालने के लिए कार्य करना चाहिए।
व कैप्टन (डॉ.) विजय राज यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षकों को सचेत करती है कि वह सब मिलकर शिक्षा के बाजारीकरण को रोकें जिससे गरीब और अमीर के बच्चे एक साथ सामान्य शिक्षा प्राप्त कर सके। शैक्षिक विभेद रोकने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
इस नेशनल सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे प्रो. अजय कुमार दूबे एवं डॉ जय किशन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार से शिक्षा स्तर में सुधार होता है। सेमिनार का आयोजन डॉ अरविंद कुमार यादव प्राचार्य श्री भगवान प्रसाद सिंह मेमोरियल बीएड कॉलेज औरंगाबाद बिहार ने कराया।
संचालन डॉ बृजबिहारी यादव, प्रवक्ता संस्कृत जीआईसी, कोडरमा, (झारखंड) ने किया। धन्यवाद ज्ञापन इडुनिक पब्लिकेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राजकुमार यादव ने किया। इस अवसर पर दो पुस्तकों बाल्यावस्था एवं उसका विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: समग्र अध्ययन का विमोचन हुआ । अतिथि शैलेश कुमार, नायब तहसीलदार, आजमगढ़, एनएसएस समन्वयक प्रो. राजबहादुर यादव, दिनेश कुमार, श्रवण कुमार,अवधेश कुमार, डॉ संजय यादव, मस्तराम यादव, मांधाता, भारतेन्दु, मैनबहादुर, शतेन्द्र, अनुराग कुमार, संतोष पाण्डेय, विनय सिंह, प्रिंस शर्मा उपस्थित रहे
विश्व पृथ्वी दिवस पर विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर आयोजित
जौनपुर : विश्व पृथ्वी दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा के निर्देशन एवं सचिव पूर्णकालिक अतिरिक्त सत्र एवं जनपद न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की देखरेख एवं उपस्थिति में एक विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का आयोजन होली चाइल्ड अकैडमी जौनपुर के परिसर में संपन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता प्रबंधक एवं संस्थापक डॉ अशोक कुमार सिंह ने किया और मुख्य अतिथि प्रशांत कुमार सिंह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहे
इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर ने कहा कि धरती को फिर से हरा भरा बनाने हरियाली लाने के लिए प्लास्टिक और पॉलिथीन का काम से कम प्रयोग करने होगा के साथ-साथ हमें जो काम चल करना है उसे आज और अभी करने पर बल देना होगा लोगों को जागरूक होना होगा और सबसे बड़ी बात पृथ्वी से ही सब कुछ है अगर पृथ्वी ही नहीं रहेगी तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा धरती मां के समान है इसलिए उसे गंदगी करने से मुक्त करने चाहिए एवं प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। और सभी को प्राधिकरण के बारे में जानकारी करके अधिक से अधिक लाभ लेने के बारे में और अधिक से अधिक वृक्ष तथा हरियाली लगाने के बारे में प्रेषित किया
कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ दिलीप कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल जनपद न्यायालय जौनपुर मैं कहा कि विश्व पृथ्वी दिवस मनाने की सार्थकता तभी है जब इसे कागज और भाषण की जगह व्यावहारिक धरातल पर उतारा जाए उन्होंने कहा कि लगातार जंगलों पेड़ पौधों और हरियाली का काटा जाना चारों ओर सीमेंट का कंक्रीट और प्लास्टिक के जंगल पैदा किया जाना कल कारखाने वाहनों रेल और हवाई जहाजों का बढ़ना प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक तथा रेडियो एक्टिव तत्वों का कूड़ा कचरा का बढ़ते जाना ऑक्सीजन का घटना और कार्बन डाइऑक्साइड के लगातार बढ़ने और हवा के जहरीला और प्रदूषित होने का प्रमुख कारण बन गया है इसके लिए हमें तत्काल युद्ध स्तर पर तैयारी करनी होगी नहीं तो आने वाले दिनों में लोगों को ऑक्सीजन का सिलेंडर पीठ पर लाद कर घूमना होगा लगातार हर घर में जेट पंप और सबमर्सिबल का बढ़ना हुआ वातानुकूलित यंत्रो का प्रयोग बिजली के चूल्हे और युद्ध में प्रयोग किया जा रहे हैं खतरनाक विस्फोटक परमाणु परीक्षण और अधिक संख्या में उपग्रह का छोड़ जाना और उनसे उत्पन्न पूरा कचरा ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन के परत में क्षेत्र का कारण बन गया है यदि मनुष्य नहीं माना तो जिस तरह बाढ़ में नदी सारा कचरा विनाश लीला मचा कर किनारो पर फेंक देती है वैसे धरती भी स्वयं को संतुलित होने के लिए धरती का सारा जीवन भयानक भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट आंधी तूफान बवंडर सुनामी लहरों के द्वारानष्ट करके नए सिरे से खुद को पुनर्चक्रण करेगी उन्होंने कहा इसलिए वेदों और धर्म ग्रंथो में धरती को मां और मनुष्य को उसका पुत्र कहा गया है
तहसीलदार सौरव कुमार ने इस अवसर पर बताया कि विकास करना आवश्यक है लेकिन इस तरह का विकास करना जो विनाश का आमंत्रित करें वह बहुत ही खतरनाक है आज हरियाली विभिन्न और पेड़ पौधा विभिन्न धरती लगातार गर्म होती जा रही है और कुछ दिन के बाद इस भयानक गर्मी में लोगों का जीना असंभव हो जाएगा इसके लिए तत्काल अभी से युद्ध स्तर पर कार्यवाही किया जाना और हरे भरे पेड़ लगाया जाना बहुत ही आवश्यक और अपरिहार्य हैं
इस अवसर पर असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल अनुराग चौधरी मनोज कुमार वर्मा एडवोकेट एवं सदस्य फ्री लिटिगेशन देवेंद्र कुमार यादव एडवोकेट काउंसलर के द्वारा बिस्तर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर के कार्यों का और प्रदेश सुविधाओं का वर्णन किया गया धरती को हारा भारत स्वच्छ ऑक्सीजन युक्त बनाने के लिए और कार्बन डाइऑक्साइड काम करने के लिए अपनी बातों को प्रभावशाली ढंग से रखा गया और ऐसी धरती का विकास करने को कहा गया जिसमें विनाश ना हो और जहां हरियाली स्वच्छता हो प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन हो प्रदूषण और गंदगी का नाम और निशान ना हो और जहां पर नदी तालाब झील समुद्र पोखर और अन्य जगह का जल पूरी तरह शुद्ध स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त हो इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिन पूर्णकाली प्रशांत कुमार सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल अनुराग चौधरी मनोज कुमार वर्मा कर्मचारी सुनील कुमार राकेश कुमार पीएलवी शिव शंकर सिंह अकादमी के छात्र-छात्राएं शिक्षक गण और प्रधानाचार्या डॉक्टर श्रीमती नीलम सिंह एवं प्रबंधन तथा संस्थापक डॉ अशोक कुमार सिंह मीडिया के लोग औरअन्य संभ्रांत लोग उपस्थित हैंउपस्थित रहे
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अशोक कुमार सिंह रघुवंशी द्वारा किया गया और धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानाचार्या डॉक्टर श्रीमती नीलम सिंहद्वारा किया गया
चौथी पुण्यतिथि पर व्यापार मण्डल ने दी अश्रुपूर्ण श्रद्धाजंलि
खेतासराय (जौनपुर) नगर के उद्योग व्यापार मण्डल की मजबूत आवाज़ और व्यापारियों के हितों की लिए सदैव संघर्षरत रहे स्व. रणजीत मौर्य की चौथी पुण्यतिथि उनके आवास पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नगर उद्योग व्यापार मण्डल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नगर के गणमान्य जनों और व्यापारियों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वर्तमान नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय विश्वकर्मा ने पूर्व व्यापार मंडल स्व. रणजीत मौर्य के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे वर्ष 2003 से 2019 तक उद्योग व्यापार मण्डल के नगर अध्यक्ष पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने न केवल व्यापारियों की समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से रखा, बल्कि उनके हक की लड़ाई में भी अग्रणी भूमिका निभाई।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उन्हें निडर, मुखर और व्यापारी समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम में गौरव मौर्य, जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय, पंकज मौर्य, रामनरायन मौर्य, चन्द्रजीत मौर्य, दिनेश मौर्या, कुंदन मौर्य सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सचिव मुनव्वर अहमद ने किया।
Jaunpur Crime News :गैंगरेप के आरोप में 9 गिरफ्तार, शाहगंज कोतवली थाना क्षेत्र में बीती रात्रि प्रदर्शनी स्थल पर एक लड़की के साथ गैंग रेप का मामला सामने आया है । सूचना पर पहुची पुलिस ने उसका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार कराया ।
उपचार के दौरान लड़की ने लिखित आधार पर पुलिस को अवगत कराया कि उसके साथ 5 लड़को ने उसके साथ दुष्कर्म किया 4 अन्य लड़को ने उनका सहयोग किया । पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पांच टीमो का गठन करते हुए ।
क्षेत्राधिकारी शाहगंज के पर्वेक्षण में थाना शाहगंज, जौनपुर पर पंजीकृत मु0अ0स0 130/2025 धारा 137(2), 70(2), 351(3), 3(5) बीएनएस व धारा 04(2) पाक्सो एक्ट में वांछित 05 अभियुक्त व 04 सह अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु कुल पांच टीमों को रवाना किया गया था।पुलिस के मुताविक अभियुक्त एक सूनसान बिल्डिंग मे इकठ्ठा होकर भागने की योजना बना रहे है, इस सूचना पर पुलिस टीम के द्वारा घेरा बन्दी किया गया और अभियुक्तों की गिरफ्तारी का प्रयास किया गया। घेरा बन्दी के दौरान अभियुक्तगण भागने के लिये बिल्डिंग की छत से कूदने और भागने लगे।
बिल्डिंग की छत से कूदने व भागने के दौरान अभियुक्तों को चोटें आयी, जिन्हें पुलिस टीम के द्वारा अस्पताल ले जाकर उपचार कराया जा रहा है। इनके कब्जे से मोबाइल फोन व अन्य सामान बरामद हुआ है। अभियुक्तों को गिरफ्तार कर आवश्यक विधिक कार्यवाही कर जेल भेजने की कार्यवाही की जा रही है।
यूनियन बैंक की सिविल लाइन्स शाखा का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण
जौनपुर l यूनियन बैंक की सिविल लाइन्स शाखा का जिलाधिकारी डा0 दिनेश चन्द्र ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सीएम युवा उद्यमी योजना के लंबित आवेदनों के ससमय निस्तारण नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई साथ ही शाखा का ऋण जमा अनुपात भी कम होने पर शाखा प्रबंधक चन्दन कुमार पर बैंक मैनेजमेंट द्वारा कड़ी कार्यवाही करने हेतु निर्देश दिया।
स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पहुँच कर क्षेत्र प्रमुख अनिल कुमार को सभी आवेदनों को अविलम्ब निस्तारित करने हेतु निर्देशित किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्टेट बैंक में सर्वाधिक आवेदन लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई। जिलाधिकारी द्वारा अग्रणी जिला प्रबंधक अभय श्रीवास्तव को सभी बैंकों की जनपद में लंबित सीएम युवा उद्यमी योजना के आवेदनों का शीघ्र निस्तारण, स्वीकृत ऋण पत्रावलियों के शीघ्र वितरण हेतु स्पष्ट निर्देश दिया।