संगठन की तपिश में तपकर निखरे ईशान जायसवाल ‘राम’, संघर्ष और वफादारी को मिला सियासी मुकाम
सियासत की चकाचौंध से दूर संगठन की बुनियाद मजबूत करने वाले ईशान बने भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष
जिम्मेदारियों की लंबी फेहरिस्त और संगठन के प्रति बेदाग समर्पण ने दिलाई नई पहचान
खेतासराय (जौनपुर): सियासत की दुनिया में कुर्सियां तो बहुतों को नसीब होती हैं, लेकिन संगठन की धूल फांककर, संघर्ष की तपिश सहकर और वर्षों तक बिना किसी बड़े ओहदे की परवाह किए अपनी वफादारी निभाने वालों को जब मुकाम मिलता है, तो वह महज एक नियुक्ति नहीं, बल्कि बरसों की तपस्या का सिला बन जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है जनपद जौनपुर में तहसील शाहगंज की सियासी जमीन से निकलकर जिला स्तर पर अपनी पहचान कायम करने वाले ईशान जायसवाल (राम) की।
भारतीय जनता पार्टी ने ईशान जायसवाल (राम) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी ताजपोशी के साथ ही शाहगंज से लेकर जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल है। इस नियुक्ति को संगठन के प्रति उनकी वर्षों की निष्ठा, जमीनी सक्रियता और सियासी संघर्ष के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।
ईशान की इस उपलब्धि के पीछे न तो कोई रातोंरात मिली शोहरत है और न ही सियासत की आसान राह। इसके पीछे संगठन की शाखाओं से लेकर चुनावी मैदान तक का लंबा सफर, जिम्मेदारियों का बोझ और कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान कायम रखने की लगातार जद्दोजहद रही है।
शाखा की अनुशासन भरी जमीन से शुरू हुआ सियासी सफर
शाहगंज नगर निवासी ईशान जायसवाल (राम) का राजनीतिक और सामाजिक सफर उन दिनों शुरू हुआ, जब उनकी पहचान किसी बड़े पद से नहीं, बल्कि संगठन के एक सक्रिय और अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में थी।
वर्ष 2009 से 2014 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की श्रीराम शाखा एवं शिवाजी शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वर्ष 2014 से 2017 तक संघ में कार्यवाह का दायित्व संभाला।
यही वह दौर था, जब संगठनात्मक अनुशासन, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और सामाजिक सरोकारों ने उनके सार्वजनिक जीवन की बुनियाद मजबूत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े विभिन्न मोर्चों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया।
न ओहदे की जल्दबाजी, न जिम्मेदारियों से किनारा
ईशान जायसवाल का संगठनात्मक सफर कई अहम जिम्मेदारियों से होकर गुजरा है। भाजपा युवा मोर्चा में मंडल मंत्री, मंडल महामंत्री और विधानसभा प्रभारी जैसे पदों पर काम करने के साथ ही उन्होंने भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई।
वर्ष 2019 से 2021 तक भाजपा युवा मोर्चा में जिला सह प्रमुख, सेवा भारती का दायित्व संभाला। वर्ष 2021 से भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा उत्तर प्रदेश में प्रदेश सोशल मीडिया सदस्य के रूप में सक्रिय रहे।
वर्ष 2025 में उन्हें भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ का जिला संयोजक बनाया गया। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन की युवा इकाई में प्रदेश महामंत्री के रूप में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई।
इन तमाम जिम्मेदारियों के बीच उनकी सियासी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता की बनी, जिसने संगठन के अलग-अलग मोर्चों पर काम करते हुए अपनी सक्रियता बरकरार रखी।
चुनावी रणभूमि में भी निभाई अहम जिम्मेदारियां
ईशान जायसवाल का सियासी सफर केवल संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं रहा। चुनावी मैदान में भी पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता युवा मोर्चा के विधानसभा प्रभारी और भाजपा के शक्ति केंद्र प्रभारी के रूप में उन्होंने काम किया। वर्ष 2024 के मछलीशहर लोकसभा चुनाव में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इसी चुनाव में सोशल मीडिया के क्षेत्र संयोजक के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में संगठन की ओर से विधानसभा प्रभारी के तौर पर काम करने का अवसर मिला। इन जिम्मेदारियों के दौरान चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े अनुभव उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा बने।
वर्षों की खामोश मेहनत को मिली पहचान
सियासत का एक दस्तूर है कि यहां अक्सर मंच पर दिखाई देने वाले चेहरे सुर्खियां बटोर लेते हैं, जबकि पर्दे के पीछे संगठन की बुनियाद मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत को पहचान मिलने में लंबा वक्त लग जाता है। ईशान जायसवाल की जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। छात्र और सामाजिक गतिविधियों से शुरू हुआ उनका सफर शाखा, मंडल, विधानसभा, जिला और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियों से गुजरते हुए अब एक नए मुकाम तक पहुंचा है। उनके समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक पद मिलने की खुशी नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सफर की उपलब्धि है, जिसमें वर्षों की मेहनत, उम्मीदें और संगठन के प्रति समर्पण जुड़ा रहा है।
नई जिम्मेदारी मिलने पर बोले ईशान, पद नहीं, कार्यकर्ताओं का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी
भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद ईशान जायसवाल (राम) ने संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और पिछड़ा वर्ग मोर्चा को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता पर जो भरोसा जताया है, वह मेरे लिए सम्मान के साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। संगठन ने मुझे पहचान दी, कार्यकर्ताओं ने हौसला दिया और वरिष्ठ नेतृत्व ने हमेशा मार्गदर्शन किया। मैं जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, उसके पीछे उन तमाम कार्यकर्ताओं की मेहनत है, जो बिना किसी पद की अपेक्षा किए दिन-रात संगठन के लिए काम करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, मेरे लिए जिलाध्यक्ष का पद कोई मंजिल नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष के एक नए सफर की शुरुआत है। मेरी कोशिश होगी कि जिले के अंतिम छोर पर खड़े कार्यकर्ता को भी सम्मान मिले और पिछड़े वर्ग के हर समाज तक संगठन की पहुंच मजबूत हो। सबको साथ लेकर चलना और नेतृत्व के विश्वास पर खरा उतरना मेरी प्राथमिकता रहेगी।
अब इम्तिहान सिर्फ संगठन चलाने का नहीं, दिलों को जोड़ने का भी
जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही ईशान जायसवाल के सामने चुनौतियों का नया दौर शुरू हो गया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग मोर्चा की सक्रियता बढ़ाना, नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ना और पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभवों का सम्मान करते हुए सामंजस्य कायम करना उनके लिए अहम होगा। पिछड़े वर्ग के विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बढ़ाना, सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना भी उनकी नई जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण कसौटी होगी।
संगठन में पद मिलने से राजनीतिक कद जरूर बढ़ता है, लेकिन असली नेतृत्व की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने साथ कितने कार्यकर्ताओं का भरोसा और सम्मान लेकर आगे बढ़ता है।
शाहगंज की सियासी फिजा में खुशी, कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को मिले नए पंख
ईशान जायसवाल (राम) की नियुक्ति से शाहगंज के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है। स्थानीय स्तर पर उनकी ताजपोशी को संगठन में सक्रिय रहने वाले युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। एक ऐसे दौर में, जब सियासत में पहचान और पद हासिल करने की होड़ तेज है, ईशान का लंबा संगठनात्मक सफर यह संदेश देता है कि निरंतर सक्रियता और जिम्मेदारियों के निर्वहन से भी राजनीतिक नेतृत्व की राह तैयार की जा सकती है। सियासत की असली कहानी सिर्फ उन लोगों की नहीं होती, जिनके नाम के आगे बड़े ओहदे लिखे जाते हैं। कहानी उनकी भी होती है, जो बरसों तक संगठन का झंडा थामे रहते हैं, मुश्किल वक्त में कदम पीछे नहीं खींचते और अपनी बारी आने तक मेहनत का दामन नहीं छोड़ते।
ईशान जायसवाल (राम) के लिए जिलाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचना एक अहम उपलब्धि है, लेकिन अब उनकी असली आजमाइश शुरू होगी। क्योंकि सियासत में ओहदा मिल जाना कामयाबी का एक पड़ाव है, मगर कार्यकर्ताओं के दिलों में जगह बनाना और उनके भरोसे पर खरा उतरना ही नेतृत्व की असली पहचान है।




