नारद मोह से रावण के अत्याचार तक होगा रामकथा का मंचन
बभनौटी में सजेगा आस्था, मर्यादा और संस्कृति का रंगमंच
खेतासराय (जौनपुर): जब मंच पर भगवान श्रीराम की मर्यादा, माता सीता का त्याग, लक्ष्मण का भ्रातृप्रेम और हनुमान की अटूट भक्ति जीवंत होती है, तो रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह जाती, बल्कि समाज को धर्म, सत्य, त्याग और कर्तव्य का संदेश देने वाली जीवंत पाठशाला बन जाती है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री हनुमान मंदिर रामलीला समिति, बभनौटी की ओर से शनिवार को मुकुट मोचन के साथ रामलीला का शुभारंभ होगा। रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के मंचन से क्षेत्र में भक्ति और आस्था का माहौल बनेगा।
रामलीला के मंच पर नारद मोह से लेकर रावण के अत्याचार तक की कथा का मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश देने का प्रयास होगा कि अहंकार, मोह और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हो जाएं, अंततः सत्य और धर्म की विजय ही होती है। रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में छिपे जीवन के आदर्श दर्शकों को मर्यादा, सदाचार और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देंगे।
मुकुट मोचन से शुरू होगी रामकथा की यात्रा
रामलीला का शुभारंभ मुकुट मोचन की पारंपरिक रस्म के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं और लोकपरंपराओं से जुड़ी यह रस्म रामलीला के आयोजन की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसके साथ ही मंच पर रामकथा की यात्रा शुरू होगी, जिसमें पात्रों के संवाद, अभिनय और प्रसंगों के माध्यम से त्रेतायुग की घटनाओं को जीवंत करने का प्रयास किया जाएगा।
नारद मोह का प्रसंग मानव जीवन में अहंकार और मोह के प्रभाव को उजागर करेगा। वहीं, रावण के अत्याचार से जुड़े प्रसंग यह बताएंगे कि शक्ति और वैभव का उपयोग यदि अन्याय के लिए किया जाए, तो उसका अंत विनाशकारी होता है। रामलीला की यही विशेषता है कि सदियों पुरानी कथा आज भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
परंपरा के साथ नई पीढ़ी को संस्कार देने की पहल
आज के बदलते दौर में जब मनोरंजन के अनेक साधन लोगों के सामने हैं, ऐसे समय में रामलीला जैसे पारंपरिक आयोजनों का महत्व और बढ़ जाता है। यह आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का अवसर भी देता है। रामलीला के संवादों और प्रसंगों में परिवार, समाज, रिश्तों, वचनबद्धता और न्याय की ऐसी सीख छिपी है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
श्री हनुमान मंदिर रामलीला समिति, बभनौटी की यह पहल धार्मिक आस्था के साथ लोकसंस्कृति को जीवित रखने का प्रयास है। रामलीला का मंच गांव की सामूहिक चेतना, सामाजिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का प्रतीक भी है। मंच पर प्रस्तुत होने वाली रामकथा दर्शकों को यह सोचने के लिए प्रेरित करेगी कि जीवन में विजय केवल बल से नहीं, बल्कि सत्य, संयम, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होती है।
समिति के अध्यक्ष जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय और प्रबंधक डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजन की तैयारियां की गई हैं। रामलीला के शुभारंभ को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह का माहौल है। मुकुट मोचन के साथ शुरू होने वाली यह धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा रामकथा के माध्यम से श्रद्धा, संस्कार और मर्यादा का संदेश जन-जन तक पहुंचाएगी।






