Homeन्यूज़शिक्षामहाविद्यालय के शिक्षकों ने कैशलेस कार्ड वापस करने का किया ऐलान

महाविद्यालय के शिक्षकों ने कैशलेस कार्ड वापस करने का किया ऐलान

न्यूनतम वेतनमान एवं विनियमितीकरण की मांग को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

  • 25 वर्षों से अल्प वेतन पर कार्यरत शिक्षकों ने सरकार से मांगा सम्मानजनक वेतन और सेवा-सुरक्षा

जौनपुर/मड़ियाहूं। शिक्षक दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में शिक्षकों के सम्मान और उनके योगदान को स्मरण किया जा रहा था, वहीं उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने न्यूनतम वेतनमान, सेवा-सुरक्षा एवं विनियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की।

शिक्षकों ने कहा कि पिछले लगभग 25 वर्षों से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक अत्यंत अल्प वेतन पर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य, वेतन और सेवा-सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

शिक्षकों ने बताया कि प्रदेश के सहायता प्राप्त 331 महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे नियमित रूप से शिक्षण, परीक्षा, मूल्यांकन एवं महाविद्यालय की अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन एवं सेवा-सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से वे अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्षरत हैं। विभिन्न सरकारों द्वारा समय-समय पर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया जाता रहा है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। शिक्षक दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी समस्याओं का समाधान न होना शिक्षकों के लिए अत्यंत निराशाजनक है।

गौरतलब है कि 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गोरखपुर में मुख्यमंत्री से भेंट कर अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को प्रमुखता से रखा था। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के लिए न्यूनतम वेतनमान निर्धारित करने तथा सेवाओं के विनियमितीकरण की मांग रखी और ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।

अनुदानित महाविद्यालय/विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश की वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही स्ववित्तपोषित शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो प्रदेशभर के शिक्षक अपने अधिकारों के लिए व्यापक एवं लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। आगामी समय में सरकार के समक्ष शिक्षकों की मांगों को और अधिक प्रभावी एवं मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

डॉ. सुशील कुमार मिश्रा ने कहा कि “यदि हम जीवित रहेंगे तभी सरकार की कैशलेस व्यवस्था हमारे लिए उपयोगी होगी। जब हम इतने अल्प वेतन में सम्मानजनक जीवन जी ही नहीं पाएंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं होंगे, तो ऐसी स्थिति में कैशलेस व्यवस्था कैसे काम करेगी? इसलिए हमारी पहली प्राथमिकता सम्मानजनक वेतन और सेवा-सुरक्षा है। इसी कारण हम कैशलेस कार्ड वापस करने का ऐलान कर रहे हैं।”

शिक्षकों ने एक स्वर में कहा—

“अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सम्मानजनक वेतन, सेवा-सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य चाहिए।”

शिक्षकों ने सरकार से अपील की कि प्रदेश के स्ववित्तपोषित शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए। साथ ही शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रखेंगे।

इसी क्रम में मड़ियाहूं पीजी कॉलेज, मड़ियाहूं, जौनपुर में स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया। शिक्षकों ने अनुदानित महाविद्यालय/विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश की वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की तथा न्यूनतम वेतनमान, सेवा-सुरक्षा एवं विनियमितीकरण की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

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