मानीकलां में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शस्त्र पूजन और पथ संचलन का आयोजन
खेतासराय (जौनपुर): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को सोंधी खंड की ओर से मानीकलां में शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। घोष की धुन पर एक साथ उठते कदम, हाथों में दंड और पूर्ण गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में चलते स्वयंसेवकों ने एकता एवं संगठन का संदेश दिया। पथ संचलन में 150 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन से हुआ। मुख्य वक्ता शैलेंद्र ने भारतीय संस्कृति में शक्ति और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शक्ति का उद्देश्य समाज की रक्षा और राष्ट्र का कल्याण होना चाहिए। भगवान श्रीराम की शक्ति आराधना और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठित और संस्कारित समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।
खण्ड कार्यवाह सोंधी अखिलेश मिश्रा ने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन एवं विचारों पर प्रकाश डालते हुए संघ की शताब्दी यात्रा का उल्लेख किया। साथ ही सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य से जुड़े पंच परिवर्तन को समाज निर्माण के लिए आवश्यक बताया।
शस्त्र पूजन के बाद शाम साढ़े पांच बजे गांधी चबूतरा स्थित रामलीला मैदान से पथ संचलन निकाला गया। स्वयंसेवक घोष की धुन पर कदमताल करते हुए श्रीराम जानकी मंदिर, सदर बाजार, डीह बाबा, कच्चा पोखरा, रविदास चौक, एजेंसी चौराहा होते हुए आंबेडकर चौक स्थित पुलिस चौकी तक पहुंचे। अनुशासित पंक्तियों में निकले स्वयंसेवकों का संचलन आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम का संचालन मुख्य शिक्षक देवेंद्र ने किया। भास्कर ने प्रार्थना, ओम ने अमृत वचन तथा संदीप और शुभम ने गणगीत प्रस्तुत किया। हृदय नारायण ने एकल गीत प्रस्तुत किया। अमित ने ध्वजवाहक तथा अवधेश, हरिओम, अर्जुन, विक्की और कृष्ण मुरारी ने गण शिक्षक का दायित्व निभाया। जिला घोष प्रमुख मुकेश के नेतृत्व में अवनीश और सक्षम सहित अन्य घोष वादकों ने वाद्ययंत्रों की धुन से पथ संचलन में उत्साह भरा। आयोजन के दौरान स्वयंसेवकों को संगठन, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का संदेश दिया गया।






