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जौनपुर में सोशल ऑडिट के नाम पर धन उगाई,जिला प्रशासन मौन

फर्जी सोशल ऑडिट के नाम पर धनउगाही, गाँव-गाँव घूमकर वसूले रुपये

वैगनआर कार सवार तीन युवक खुद को ऑडिटर बताकर पहुँचे ग्राम पंचायतों में, फाइलों की जाँच के नाम पर दर्जनों गांव से वसूली

खेतासराय (जौनपुर) विकास खण्ड के अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में फर्जी सोशल ऑडिट टीम के नाम पर धनउगाही का सनसनीखेज मामला शनिवार को प्रकाश में आया है। कार से पहुँचे तीन युवक खुद को ऑडिटर और विभागीय अधिकारी बताकर ग्राम पंचायतों में दाखिल हुए तथा विकास कार्यों से संबंधित अभिलेखों और फाइलों की जाँच के नाम पर ग्राम प्रधानों पर दबाव बनाकर धन वसूलने लगे। मामले का खुलासा होने के बाद क्षेत्र में हड़कम्प मच गया और कथित ऑडिटर बैगनार कार पर सवार हो कर फरार हो गए।

गौरतलब हो कि ग्राम पंचायतों में प्रत्येक वर्ष विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं तथा आय-व्यय का सोशल ऑडिट कराया जाता है। शाहगंज-सोंधी ब्लॉक की अधिकांश ग्राम पंचायतों का ऑडिट पहले ही सम्पन्न हो चुका था, जबकि लगभग 27 ग्राम पंचायतों का ऑडिट शेष रह गया था। हालांकि ऑडिट की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी थी और इस संबंध में जिला प्रशासन अथवा संबंधित विभाग द्वारा कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया था।

इसी बीच तीन युवक एक कार से ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गाँव में पहुँचे उनके पास उन ग्राम पंचायतों की सूची थी, जिनका ऑडिट शेष बताया जा रहा था। युवकों ने स्वयं को अधिकृत ऑडिटर बताते हुए ग्राम पंचायतों की फाइलें, वाउचर, भुगतान रजिस्टर तथा अन्य अभिलेखों की जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान वे विभिन्न त्रुटियां निकालने का हवाला देकर ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई का भय दिखाने लगे और कथित रूप से रुपये की माँग करने लगे।

बताया जाता है कि ग्राम पंचायत भरोठा में पहुँची टीम ने ग्राम प्रधान अमरदेव गौतम से अभिलेखों में अनियमितता बताकर 25 हजार रुपये की माँग की। काफी बातचीत और मोलभाव के बाद कथित ऑडिटरों ने 10 हजार रुपये ले लिए। इसके बाद टीम ग्राम पंचायत वसीरपुर पहुँची, जहाँ ग्राम प्रधान ज्ञानचंद्र सोनकर से भी ऑडिट के नाम पर दो हजार रुपये वसूलने का आरोप है।

सूत्रों के मुताबिक इसके बाद उक्त युवक ग्राम पंचायत अरंद पहुँचे और वहाँ भी आय-व्यय संबंधी दस्तावेजों की जाँच करते हुए कमियां निकालने लगे। जब टीम अब्बोपुर गाँव पहुँची तो कुछ लोगों को उनके तौर-तरीकों पर शक हुआ। ग्राम प्रधानों और स्थानीय लोगों ने उनकी पहचान तथा नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जाँच शुरू की। छानबीन के दौरान पता चला कि जिले से किसी भी प्रकार के सोशल ऑडिट या विशेष जाँच का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

मामला संदिग्ध होने पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने युवकों से कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान वे अपने अधिकार और नियुक्ति संबंधी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। स्थिति बिगड़ती देख तीनों युवक वहाँ से निकलने का प्रयास करने लगे और मौका पाकर फरार हो गए। घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों में भी बेचैनी और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। कई प्रधानों ने आशंका जताई कि फर्जी ऑडिट के नाम पर सुनियोजित तरीके से उगाही की जा रही थी।

इस संबंध में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) शाहगंज-सोंधी पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि सोशल ऑडिट के लिए जिले से कोई नया आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि धनउगाही की शिकायत उनके संज्ञान में नहीं थी, लेकिन यदि ऐसा मामला सामने आया है तो इसकी जाँच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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