वार्ड नंबर-3 में स्थायी विद्युत पोल न होने से लोग परेशान
- विभागीय लापरवाही पर फूटा आक्रोश, कई बार शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
खेतासराय (जौनपुर): नगर पंचायत खेतासराय के वार्ड नं. 3 पोस्ट ऑफिस मोहल्ला में स्थित आबादी क्षेत्र के लोगों की परेशानी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। राज गौरव आईटीआई के समीप मकान बनाकर रह रहे दर्जनों परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे गम्भीर समस्या बिजली आपूर्ति की है। जहाँ स्थायी विद्युत पोल न लगने के कारण बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर बिजली पहुँचाई जा रही है। यह व्यवस्था न केवल विभागीय लापरवाही की कहानी बयां कर रही है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी दावत दे रही है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात और तेज हवाओं के दौरान बांस-बल्ली के सहारे टंगे बिजली के तार झूलने लगते हैं। जिससे करंट फैलने और जान-माल के नुकसान का खतरा बना रहता है। मोहल्ले के लोग हर वक्त खौफ, बेचैनी और फ़िक्र के साये में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मोहल्ले के निवासी ज्ञानचंद गुप्ता, रोहित प्रजापति, चमेला देवी, उर्मिला देवी, रिंकू यादव, राम नवल, राजेश बिन्द, तारा देवी और रामसिंगार यादव ने बताया कि वर्षों से यहां स्थायी विद्युत पोल लगाने की माँग की जा रही है। इसके बावजूद विभाग की ओर से सिर्फ आश्वासन दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की बेपरवाही और ग़फ़लत के कारण आबादी क्षेत्र के सैकड़ों लोग जोखिम भरे माहौल में रहने को विवश हैं।
नामित सभासद सोनू बिन्द ने कहा कि यदि किसी दिन बांस-बल्ली टूट गई या तार नीचे गिर गए तो बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में लगातार दहशत और बेचैनी बनी हुई है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही स्थायी पोल लगाकर सुरक्षित बिजली व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन तथा विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से माँग की है कि मामले को गम्भीरता से लेते हुए तत्काल स्थायी विद्युत पोल स्थापित कर सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए, ताकि किसी संभावित अनहोनी, हादसे या जानलेवा दुर्घटना से पहले समस्या का समाधान हो सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के दावों के बीच आबादी क्षेत्र में बांस-बल्ली के सहारे दौड़ती बिजली व्यवस्था सरकारी तंत्र की उदासीनता का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी लोगों की फ़रियाद सुनते हैं या फिर किसी बड़े हादसे के बाद जागते हैं।




