फर्जी सोशल ऑडिट की आड़ में उगाही का खेल बेनकाब, गाँव-गाँव घूमकर प्रधानों से ऐंठे रुपये
जौनपुर: शाहगंज-सोंधी विकास खंड में फर्जी सोशल ऑडिट के नाम पर की जा रही धनउगाही का एक सनसनीखेज़ मामला सामने आया है। कार सवार तीन युवकों ने खुद को विभागीय ऑडिटर और अधिकारी बताकर ग्राम पंचायतों में दस्तक दी और विकास कार्यों की फाइलों में कथित खामियाँ निकालकर ग्राम प्रधानों को कार्रवाई का खौफ दिखाते हुए रुपये वसूले। मामला उजागर होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और कथित ऑडिटर मौके से फरार हो गए।
सूत्रों के मुताबिक, इन युवकों के पास उन ग्राम पंचायतों की सूची थी जिनका सोशल ऑडिट शेष बताया जा रहा था। उन्होंने पंचायतों में पहुँचकर अभिलेख, वाउचर और भुगतान रजिस्टर की तहकीकात शुरू की और अनियमितताओं का हवाला देकर प्रधानों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि ग्राम पंचायत भरोठा में प्रधान अमरदेव गौतम से 25 हजार रुपये की माँग की गई, बाद में 10 हजार रुपये लेकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई। वहीं वसीरपुर में भी प्रधान से दो हजार रुपये वसूलने का आरोप है।
मामले की हकीकत तब सामने आई जब अब्बोपुर गाँव में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को युवकों की गतिविधियों पर शुब्हा हुआ। लोगों ने उनकी पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि जिले से किसी भी प्रकार के सोशल ऑडिट का कोई नया आदेश जारी ही नहीं हुआ है। सख्त पूछताछ में कथित ऑडिटर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। खुद को घिरता देख तीनों युवक मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बेचैनी और अफरा-तफरी का माहौल है। प्रधानों का कहना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा उगाही का गिरोह हो सकता है, जो सरकारी जांच के नाम पर ग्रामीण प्रतिनिधियों को निशाना बना रहा था। इस मामले में खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) पीयूष त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट के लिए जिले से कोई नया आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि धनउगाही की शिकायत मिली है तो पूरे मामले की गहन जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उधर, सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के चिरैयाडीह गाँव में फर्जी ऑडिटर बनकर धनउगाही करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अमरेंद्र कुमार पांडेय के अनुसार ग्राम प्रधान अमरदेव की तहरीर पर अंकित, वीरू और नवनीत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। तहरीर के अनुसार एक युवक ने फोन कर स्वयं को विकास भवन का ऑडिटर बताया और अगले दिन घर पहुँचकर धन वसूलने का प्रयास किया। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के तार खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं यह गिरोह अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह लोगों को अपना शिकार तो नहीं बना रहा था। सरकारी जाँच का नाम लेकर गरीब ग्रामीण व्यवस्था को ठगने वालों पर अब कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। क्षेत्र की जनता की निगाहें अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।




