मौसम की भविष्यवाणी ; 5 जून से लेकर 20 जून तक महाराष्ट्र मध्य प्रदेश उड़ीसा आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा दिल्ली बेहद गर्म और पसीने से भरा रहेगा जब की 4 जून को दूसरी बार मानसून केरल में प्रवेश करेगा और केरल कर्नाटक गोवा तमिलनाडु में पांच जून तक फैल जाएगा 10 जून तक या महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश उड़ीसा बंगाल सिक्किम नेपाल भूटान अरुणाचल प्रदेश असम मिजोरम त्रिपुरा मेघालय मणिपुर में फैल जाएगा
15 जून तक यह गुजरात और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भागों में पहुंच जाएगा जबकि 20 जून तक इसके दक्षिणी और पूर्वी उत्तर प्रदेश बिहार और दक्षिणी पूर्वी राजस्थान में पहुंचने की संभावनाएं हैं 25 जून तक यह दिल्ली और उत्तराखंड में पहुंच जाएगा 30 जून तक इसके संपूर्ण भारत में पहुंचकर फैल जाने की आशा है
जौनपुर और आसपास भी है 18 से 21 जून के आसपास पहुंच रहा है तब तक भयंकर गर्मी कितना और प्रचंड अल्ट्रावायलेट किरणें बहुत ही भीषण रूप में रहेंगे इस कालखंड में कुछ आंधी तूफान वज्र पर बिजली की गरज और चमक के साथ होने वाली वर्षा जो दो बार संभव है कुछ राहत देगी बाकी समय भीषण और प्रचंड रहेगा लोग गर्मी से पागल हो जाएंगे जिसकी वजह है कि 40 से 43 डिग्री सेल्सियस का तापमान वास्तविक रूप में 47 से 51 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा 18 जून के आसपास इसमें राहत की संभावना है
इस बार का मानसून अनिश्चित अनियमित विलंबित और बीच-बीच में टूटने वाला रहेगा जिससे बार-बार सूखा और काल की स्थितियां पैदा होगी खेती किसानी बागवानी इत्यादि करने वालों को इसका ध्यान रखना होगा इसके साथ-साथ अचानक ही एक ही साथ भयानक वर्षा होने से भी भयंकर स्थितियां पैदा होगी वर्ष का समय कम लेकिन तीव्रता बहुत अधिक रहेगी अधिकांश वर्षा झंझा झकोर घन गर्जन वज्रपात वारिदमाला बिजली की गरज और चमक तथा भयानक वज्रपात के साथ होगा धन-धन और पशुओं के भीषण हानि होगी कुल मिलाकर अभी 10 दिनों तक भयानक गर्मी उमस पसीना झेलने को विवश रहना पड़ेगा हवा लगातार बदलती रहेगी और हवा की गति धीमी होने से गर्मी पसीना और भी अधिक होगा ।
इन सभी का कारण वर्षा और हरियाली का पेड़ पौधों का लगातार भयानक रूप से घटते चले जाना सीमेंट कंक्रीट और पत्थर के जंगल और पक्की फर्श का लगातार विस्तार होना वातावरण में प्रदूषण गंदगी और विकिरण के कारण प्रचंड पराबैंगनी किरणों का निर्माण ओजोन की परत में छेद और संतुलन सूर्य में होने वाली बहुत ही भयानक परमाणु नाभिकीय अभिक्रियाएं और उत्सर्जित होने वाला विकिरण हिमालय का अमीर और तिब्बत के पत्थर तथा ध्रुव प्रदेशों में बर्फ और ग्लेशियर की कमी जगह-जगह रेडियो और मोबाइल के टावर जल स्रोतों का लगातार घटना और धरती की नमी का काम होना तथा भूमध्य सागर और विषुवत प्रदेशों में जलवायु में असंतुलन इसका प्रमुख कारण है प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पत्थर और पर्वतों का वनस्पति और पेड़ पौधों से विहीन हो जाना जैसी परिस्थितियों प्रकृति को पूरी तरह से बदलकर उग्र और भयानक बना रहे हैं और यह सब कुछ आज की पढ़ी-लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का कमाल है यदि कुछ बहुत ही बड़ा कार्य इन सबको रोकने के लिए नहीं किया गया तो भयानक विनाश प्रचंड चक्रवात और तूफान ज्वालामुखी विस्फोट सुनामी लहरों और भूकंप मानव सभ्यता को तहस-नहस कर देंगे।
- भविष्यवाणी -डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि




