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दीपावली महापर्व पर ही प्रदूषण और जहरीली हवा का रोना क्यों ,डॉ दिलीप कुमार सिंह मौसम विज्ञानी ज्योतिष शिरोमणि

JAUNPUR NEWS IN HINDI ” दीपावली का महापर्व अंधकार पर प्रकाश की असत्य पर सत्य की अज्ञान पर ज्ञान की जीत का महापर्व है यह खुशियों का मिष्ठान का और व्यंजन का भी महापर्व है और यह प्राचीन भारत के चार महान पर्वों दीपावली दशहरा होली और रक्षाबंधन में से एक है भारत के अन्य बड़े त्यौहार वर्तमान में नवरात्रि छठ का महापर्व और कुछ अन्य पर्व भी आते हैं मैं जन्म से लेकर आज तक देख रहा हूं और 50 वर्षों का तो मुझे एक-एक महापर्व याद है कि कैसे दीपावली के नजदीक आते हैं देश की सरकार देश के सभी तंत्र बुद्धिजीवी वर्ग में से कुछ चुने लोग कांग्रेस और वामपंथी तथा विपक्षी दल पता नहीं किस प्रभाव के अंतर्गत दीपावली के एक सप्ताह पहले से लगातार जहरीली हवा और प्रदूषण पर लंबे चौड़े बयान देते हैं और टेलीविजन रेडियो समाचार पत्र सोशल मीडिया पर आतिशबाजी पटाखे को इसका कारण बताते हुए दीपावली को बर्बाद करने का पूरा प्रयास करते हैं इसी तरह हर एक सनातनी धर्म के त्यौहार पर यह बयानबाजी शुरू होती है चाहे रंग और पानी की बर्बादी का होली हो या विजयादशमी हो या कोई अन्य महापर्व है यह अत्यंत गंभीर और घातक प्रवृत्ति है


जब भी प्रकाश का महापर्व दीपावली आता है तो उस समय संपूर्ण भारत में तुलनात्मक रूप से वायु गुणवत्ता सूचकांक अधिक हो जाता है और प्रदूषण भी अधिक होता है और स्वाभाविक रूप से थोड़ी बहुत हवा भी जहरीली हो जाती है क्योंकि वर्षा काल समाप्त हो जाने पर शुष्क वातावरण में वर्षा से जमीन और जल में घुलकर प्रदूषण और जहर नीचे आ जाता है जो जमीन पर आ जाती है और जहरीले तत्व भी वर्षा के साथ घुलकर नदियों और अन्य जल स्थानों में चले जाते हैं जबकि वर्षा के काल में लगातार वर्षा और तेज हवा के कारण आसमान स्वच्छ और पारदर्शी हो जाता है इसलिए हवा भी बहुत सुंदर स्वच्छ और ताजी हो जाती है और धरती से बादलों के बीच उपस्थित सारा जहरीला तत्व समाप्त हो जाता है और यही 8 किलोमीटर की ऊंचाई का समताप मंडल होता है जहां तक गैस धूल के कण जहरीली गैस है और अन्य प्रदूषण तत्व विद्यमान होते हैं इसलिए जो वायु गुणवत्ता सूचकांक मई जून में 400 से 600 के बीच होता है वही वायु गुणवत्ता सूचकांक जुलाई से अक्टूबर के बीच शून्य से 50 के बीच रहता है और 15 अक्टूबर के बाद यह तेजी से बढ़कर 200 से 400 के बीच पहुंच जाता है और इस बार तो आश्चर्यजनक रूप से जुलाई अगस्त सितंबर अक्टूबर 4 महीने जौनपुर जैसे नगर की वायु गुणवत्ता सूचकांक 10 से 50 के बीच रही और भारत के लगभग संपूर्ण क्षेत्रफल का यही हाल रहा और मजे की बात यह है कि इस समय ना कोई आतिशबाजी होती है ना पटाखे छोड़े जाते हैं ना ऐसी कोई अन्य गतिविधि होती है और इस कालखंड में पराली भी नहीं जलाई जाती है।

लेकिन सब सत्ता पक्ष और विपक्ष के इशारे पर बुद्धिजीवी लोग और कांग्रेस तथा वामपंथी लोग विशेष करके इस गंदगी प्रदूषण और बढ़े हुए वायु गुणवत्ता सूचकांक और जहरीली हवा को बड़े आराम से दीपावली और पराली से जोड़ देते हैं जो पूरी तरह से गलत और नियम के विरुद्ध होता है क्योंकि यह समय ही ऐसा होता है जब 15 अक्टूबर से 15 दिसंबर के बीच संपूर्ण देश में प्रदूषण जहर फैल कर वायु गुणवत्ता सूचकांक को 300 से 600 के बीच ले जाता है ।

यहां इस संदर्भ में याद रखना आवश्यक है कि दीपावली मुख्य रूप से भारत में और गौण रूप से दुनिया के 10 15 देश में मनाई जाती है लेकिन ईद और नवरोज जैसे मुस्लिम पर्व में और क्रिसमस और नए अंग्रेजी वर्ष में जब संपूर्ण दुनिया में इससे सैकड़ो गुना अधिक पटाखे जलाए जाते हैं और आतिशबाजी होती है तब कोई भी सरकार सत्ता पक्ष या विपक्ष या बुद्धिजीवी वायु प्रदूषण की जहरीली हवा की अथवा जहर भारी गंदगी की बात नहीं करता है ना मीडिया और सोशल मीडिया में यह सब छापा जाता है जबकि यह सब त्यौहार पूरी दुनिया में मनाया जाते हैं इतना ही नहीं जब बकरीद के दिन भारत सहित सारी दुनिया में अर्बन गाय बैल ऊंट भेड़ बकरी दुंबा काट दिए जाते हैं और सारी धरती खून से लथपथ हो जाती है और उसका मांस मजा और रुधिर चारों ओर सड़ने लगता है और वातावरण भयंकर दुर्गंध से भर जाता है और जल तथा नदियां इसके मल मूत्र और मांस मज्जा से गंदी हो जाती हैं तब सबका साहस जवाब दे जाता है और प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया और सोशल मीडिया भी डर के मारे चुप रहता है उन्हें यह लगता है कि क्रिसमस के प्लास्टिक के पेड़ प्रचुर मात्रा में ताजी हवा और …ऑक्सीजन छोड़ते हैं और सारे जहर को सोख लेते हैं अब और इजराइल में तथा ईरान में रूस और यूक्रेन में जहां वर्षों से युद्ध चल रहा है सूचकांक 100 के ऊपर नहीं गया है जहां दिन रात हजारों टन बारूद बम गिर रहे हैं तो फिर एक दिन दिवाली के पटाखे और आतिशबाजी किस तरह प्रदूषण और जहरीली हवा के कारण हो सकते हैं यह समझ के बाहर हैं
।
जबकि सत्ता पक्ष और विपक्ष और सभी सरकारी तंत्र वायु प्रदूषण जहर और जहरीली हवा तथा वायु गुणवत्ता सूचकांक के भयानक होने के असली कारण को दिवाली और पराली में छिपा ले जाते हैं जहरीली हवा और वायु गुणवत्ता सूचकांक के मुख्य कारणों में हर जनपद में दौड़ रहे करोड़ों वाहन पूरी दुनिया में दौड़ रहे अरबों खरबों वाहन रेडियो और मोबाइल तथा अन्य टावर से निकलने वाली जहरीली ध्वनि तरंगें और रेडिएशन भट्ठे और कल कारखानों से निकल रहे जहर सुनारी के काम में लगे तेजाब और अन्य जहरीले पदार्थ जहर से युक्त कृत्रिम खादों का पूरी दुनिया में भयानक प्रयोग साबुन डिटर्जेंट निरमा पाउडर जैसे भयानक प्रदूषण जहर फैलाने वाले तत्व युद्ध में प्रयोग किए जाने वाले अस्त्र-शस्त्र बम और प्रक्षेपास्त्र तथा रॉकेट और हवाई जहाज तथा जलयानों और रेलगाड़ियों से निकलने वाला जहरीला धुआं परमाणु परीक्षण से भयानक रेडियोएक्टिव प्रदूषण और उसके जहर का पूरी धरती पर फैल जाना और अन्य उत्सर्जन पेड़ पौधों का अंधाधुंध काटने से ऑक्सीजन का काम होना हरियाली को काम करके उसकी जगह सीमेंट और कंक्रीट की सात बढ़कर कंक्रीट के जंगल उग देना प्लास्टिक का भयानक प्रयोग जैसे कर्म को पूरी तरह नजर अंदाज किया जाता है आप सबको वह तथ्य याद होगा जब कोरोना के काल में 99% यातायात बंद हो गया था तब सारी धरती और भारत का प्रदूषण समाप्त हो गया था और आसमान स्वच्छ नीला पानी बिल्कुल स्वच्छ और पारदर्शी हो गया था हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां दूर-दूर दिखाई देती थी और रात में आसमान के चमकदार तारे बहुत दिनों बाद दिखाई पड़ने लगे थे।

लेकिन कोरोना भी इतने के साथ-साथ यह सब फिर पहले जैसा हो गया कुछ दिन तक सरकारी तंत्र के द्वारा साइकिल पर चलने की नौटंकी की गई कुछ दिन दिल्ली में प्रथम द्वितीय तृतीय चरण का नाटक किया गया लेकिन इससे क्या होता है यदि 2 किलोमीटर तक भारत में सबको पैदल चलकर काम करना 10 किलोमीटर तक साइकिल पर काम करना जनता अधिकारी राजनेता के लिए अनिवार्य कर दिया जाए तो 90% प्रदूषण और जहर अपने आप घट जाएगा लेकिन जो लोग मूत्र त्याग करने तक बाइक से जाते हैं वही बुद्धिजीवी बनाकर सबको वायु प्रदूषण पर शिक्षा देते हैं जितने भी काम मानवता और मानव सभ्यता कर रही है वह सारे काम जहर को बढ़ाने वाले हैं प्रदूषण को जहर बनाकर बढ़ाने वाले और वायु गुणवत्ता सूचकांक को 1000 तक ले जाने वाले हैं इन सब पर ध्यान न देते हुए केवल सनातन धर्म के दिवाली और पराली होली दशहरा को प्रदूषण का कारक बताकर उस पर रोक लगाना न केवल हास्यास्पद है बल्कि धर्म पर सीधा आघात और कानून व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी चुनौती भी है और धर्म विशेष के लिए उसका दुरुपयोग करना एक गंभीर प्रश्न चिन्ह है

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