#खुटहन के कपसियां गांव में पखवाड़ा बाद भी नहीं बदला जा सका जला ट्रांसफार्मर
खुटहन (जौनपुर) स्थानीय थाना क्षेत्र के कपसियां गांव में लगा 63 केवीए का ट्रांसफार्मर जल जाने से पूरे गांव में एक पखवाड़ा से अंधेरा पसरा हुआ है। लोगों को पेयजल और सिंचाई के साथ साथ मोबाइल चार्ज को लेकर भारी फजीहत झेलना पड़ रहा है। शिकायत दर्ज कराने के दो सप्ताह बाद भी ट्रांसफार्मर न बदले जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
गांव में लगा ट्रांसफार्मर गत 24 जुलाई को फुंक गया। जिसकी आनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई। बावजूद इसके पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। गांव के विनोद,राम अकबाल,भानू ,समर बहादुर,जगत,बरसातू, सुरेंद्र, चंद्र देव आदि ने आक्रोश जाहिर करते हुए ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाए जाने की मांग किया है।
जौनपुर : ई-लाटरी से कृषि यंत्रों हेतु कृषको का हुआ चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित 15 सदस्यीय जनपद स्तरीय कार्यकारी समिति की निगरानी में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन योजनान्तर्गत तीन कस्टम हायरिंग सेंटर लक्ष्य के सापेक्ष कृषि यंत्रों हेतु ई-लाटरी के माध्यम से तीन कृषको का पारदर्शी तरीके से चयन किया गया।
एलईडी लगाकर पहले किसानों को डेमो के रूप में मार्क ड्रील करके दिखाया गया फिर ई-लाटरी द्वारा विकास खण्ड करंजाकला, बरसठी एवं रामनगर से एक एक किसान का चयन किया गया। कार्यक्रम का संचालन उप परियोजना निदेशक आत्मा डा0 रमेश चंद्र यादव ने किया। पारदर्शी तरीके द्वारा ई-लाटरी से कृषि यन्त्रो हेतु कृषको के चुनाव की प्रक्रिया को किसानों ने सराहा।इस मौके पर जिलाधिकारी की प्रतिनिधि के रूप में डीडी एजी हिमांशु पांडेय, जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी डा0 सीमा सिंह राणा, डीआईओ एनआईसी, एलडीएम, जिला गन्ना अधिकारी सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।
कोटा में कोटा के विवाद का मामला भी पहुंचेगा सुप्रीम कोर्ट
दलितों को तोड़ने की सत्तादल कर रहे हैं साजिश
सभी वर्ग के आरक्षण खत्म करने की सीढ़ी हो गई तैयार
व्यक्ति का उत्थान उसकी जाति को निरूपण नहीं करता
सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त 2024 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण बारे में ऐतिहासिक फै़सला सुनाते हुए कहा कि सरकार इन समुदायों के आरक्षण सीमा के भीतर अलग से वर्गीकरण कर सकती है। न्यायालय के इस फैसले का सीधा-सीधा अर्थ है क्रीमीलेयर। मेरा मतलब न्यायालय के फैसले का विरोध करना नहीं है, न हीं उस पर उंगली उठाना। सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी न्यायिक संस्था है उसका फैसला सर्वोच्च है। मुझे उस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि इस फैसले के बाद गेंद सरकार के पाले में आ जाएगी। सरकार संसद के पटल पर रखकर ही अपना निर्णय सुना सकती है। मैं अपने लेख में सिर्फ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के बारे में विश्लेषण कर अपने विचार रख रहा हूं। मेरा मकसद सिर्फ और सिर्फ इतना है कि सरकार और दलित नेताओं की इस पर चुप्पी से है। अदालत की आड़ में सत्तापक्ष के लोगों ने वहीं किया जो उनकी मंशा थी। कोई भी देश दो-तीन राज्यों के दलितों की समस्या का आकलन कर उसे पूरे देश के दलितों पर लागू नहीं कर सकता। यह तो वही बात हुई की लकड़ी के लिए पूरे पेड़ को काटा जाए। इस फैसले की आग धीरे-धीरे फैल रही है। सभी दलित एकजुट होकर इसका विरोध करने जा रहे हैं। आंदोलन का स्वरूप तैयार कर रहे हैं। लेकिन सरकार की तरफ से कोई बयान न आना भी लोगों को साजिश की तरफ संकेत कर रहा है। मुझे लगता है कि राजनीतिक दल के साथ जुड़े दलित नेता भी ठीक ढंग से इस फैसले को समझ नहीं पाएं है। कुछ समझे हैं तो पार्टी की लाइन के खिलाफ बोलने की उनमें हिम्मत नहीं है। राजनीतिक दल का चुनाव के पहले सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ और पीडीए के नारे पर सदन में अपनी संख्या तो बढ़ा ली गई लेकिन दलित जनता के विश्वास के साथ सभी दल धोखाधड़ी कर रहे हैं। यह कहने में मुझे कोई गुरेज नहीं की राजनीतिक दल की नजर में दलित और हासिए का समाज सिर्फ वोटर बनकर रह गया है। अभी पड़ोसी बंगला देश का हाल किसी से छिपा नहीं है, कोटा के मामले ने गृहयुद्ध पैदा कर दिया और सेना के हाथ में देश चला गया। मेरा मानना है कि इस तरह के फैसले से देश की सर्वोच्च तीनों संस्थाओं को बचना चाहिए। साथ ही सरकार को भी न्यायालय के समक्ष ऐसे मामलों पर सुझाव रखने चाहिए।
सिर्फ चिराग पासवान ने ही इस मामले पर बोला कि सरकार से रिव्यू पिटीशन दाखिल करने कहा जाएगा। बड़े आश्चर्य की बात है कि जाति जनगणना की बात करने वाले भी इस फैसले पर अपने पार्टी की राजनीति का चश्मा लगाए हुए हैं। यह साबित करता है कि हम अपने को आदर्शवादी और दलितों का मसीहा बनने का नाटक करते हैं। संविधान और आरक्षण बचाने का भरोसा दिलाने वाले वोट लेने के बाद भी एक भी बयान दलितों के पक्ष में नहीं दिए। चाहे वह काग्रेस सपा हो या राजद। इसलिए एससी और एसटी समाज को एकजुट होना पड़ेगा। मेरा मानना है कि इस तरह के फैसले से देश में जातिविहीन समाज की स्थापना का प्रयास चल रहा है। आने वाले दिनों में इससे कोई जाति को उत्तर प्रदेश में 30 प्रतिशत रिजर्वेशन मिले और महाराष्ट्र में उसे 5 फीसदी मिले। इससे राजनीतिक रूप से मजबूत नेता यानी सत्ता पक्ष एससी और एसटी में सरकार को समर्थन करने वाली जाति के आरक्षण का प्रतिशत बढ़ा सकते हैं। ओबीसी के क्रीमीलेयर और एसी-एसटी के क्रीमीलेयर में काफी अंतर है। यह प्रवेश, नौकरी से लेकर विधानसभा और लोकसभा की सुरक्षित सीटों पर लागू होगा। इससे अब जाति की राजनीति राज्यों में गहरा जाएगी और यह राज्य सरकार की मर्जी पर डिपेंड हो जाएगी। अब सरकार चाहेगी कि पढ़े लिखे विद्वान शिक्षक और रिटार्यड आईएएस राजनीति में नही आए। कम पढ़े लिखे लोगों को वह वोट देकर कठपुतली बनाकर लोकसभा और विधानसभा में लाएगी ताकि कोई इनकी आवाज को न उठा सके। यह फूट डालो और राज करों की नीति अपनाएगी। 17 राज्य ऐसे हैं जहां जाति की राजनीति पर सरकार बनती और बिगड़ती है। देश के दलित नेताओं को यह समझना होगा कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
यह एक दूरगामी सोच के तहत साजिश की गई है। यह देश के पूरी आरक्षण व्यवस्था को आने वाले दिनों में ध्वस्त करने वाली है। आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है। यह आर्थिक आधार पर नहीं सामाजिक आधार पर बना है। यह एक साजिश है। एसी और एसटी को मुख्यधारा से अलग करने की। अगर इसमें क्रीमीलेयर लागू हो गया तो एससी और एसटी के लोग सिर्फ क्लर्क, चपरासी और सिपाही कैडर में ही नौकरी पाएंगे, क्योंकि जो स्टीफेंस और कान्वेंट कल्चर के बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले लोग है जाहिर से बात है कि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वह क्रीमीलेयर के कारण सिविल सर्विस की परीक्षा में जनरल कैंडिडेट के रूप में शामिल होंगे। अगर किसी भी तरह वह परीक्षा पास करते है तो उन्हें इंटरव्यू के दौरान नंबर कम दिया जाएगा ताकि उनका सेलेक्शन नहीं हो, क्योंकि उन पर दलित की मुहर लगी है। इसका उदाहरण उच्च शिक्षा और बड़े पदों के इंटरव्यू में देखा जा रहा है। सभी आरक्षित सीट को एनएफएस (नाट फार सूटेबल) किया जा रहा है। अगर क्रीमीलेयर की व्यवस्था लागू हो गई तो गरीब तबके के लोगों के पास उच्च पदों पर पहुंचने के लिए न तो कोचिंग करने का पैसा होगा न ही हास्टल में रहकर तैयारी करने की सुविधा होगी। जाहिर सी बात है कि सभी सीट पर योग्य उम्मीदवार ही नहीं मिलेंगे और आगे चलकर यह सीट जनरल कैटेगरी को मिल जाएगी। हमें इस साजिश को समझने की जरूरत है। अगर हमारे समाज का क्रीमीलेयर व्यक्ति आईएएस बनता है बड़े पदों पर जाता है, मंत्री बनता है तो हम तो अपनी गुहार लगा सकते हैं उससे। मेरा मानना है कि इस फैसले से हम फिर 1947 के पीछे वाली स्थिति में जा सकते हैं। इस फैसले को लागू करना सरकारों के लिए काफी कठिन होगा। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सुनाए फ़ैसले के बारे में बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील संघराज रूपवते ने कहा, “सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों ने एक बार फिर अदालत की आड़ में वही किया है जो वे चाहते थे. यह एक ऐसा फ़ैसला है जो हमें जातिविहीन समाज से दूर ले जाता है. अनुसूचित जाति और जनजाति के उप-वर्गीकरण की अनुमति देना छह न्यायाधीशों की एक बड़ी गलती है. जस्टिस बेला त्रिवेदी की एकमात्र असहमति ही संवैधानिक क़ानून का सही पुनर्कथन है.” उल्लेखनीय है कि पंजाब में 1975 में एसी. एसटी एक्ट की आरक्षित सीट को दो भागों में बांट दिया गया है।
पहला बाल्मीकि और मजहबी सिख और दूसरा अन्य अनुसूचित जाति। तीस साल तक यह नियम लागू रहा 2006 में मामला पंजाब, हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। इसमें 2004 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2004 के फैसले का हवाला देते हुए रद कर दिया। कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति में सब कटेगरी एलाऊ नहीं है, क्योंकि यह समानता के आदेश का उल्लंघन है। कुछ सामान्य वर्ग के बुद्धजीवियों का मानना है कि आरक्षण की वजह से देश बर्बाद हो रहा है। अब ये बताइये की देश आजाद होने के बाद 14 व्यक्ति देश के राष्ट्रपति बने और 15 प्रधानमंत्री, 43 चीफ जस्टिस और 19 मुख्य चुनाव आयुक्त बने इसमें कितने रिजर्वेशन वाले हैं। हम घोटाले की बात करें तो सत्यम घोटाला, बोफोर्स घोटाला समेत सैकड़ों घोटाले में कोई दलित नहीं है तो ये देश को बर्वाद करने वालों में कौन हैं। बस हमारे समाज के लोग कुछ अच्छे पदों पर चले गए तो इनके पेट में दर्द होने लगा। जाति एक सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है, आर्थिक स्थिति का जाति पर कोई असर नहीं पड़ता है। बाबा साहेब ने दलितों को आरक्षण का आधार भी सामाजिक बनाया था न कि आर्थिक। ओबीसी का आरक्षण बाद में आया। यह ऐसे समय में आया कि ओबीसी से जुड़ी कई जातियां सम्पन्न हो चुकी थी, इसलिए इसमें क्रीमीलेयर की जरूरत पड़ी। इस आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव नहीं था, इसलिए लोकसभा और विधानसभा में इनके लिए सीट सुरक्षित नहीं की गई। कुल मिलाकर यही कहना है कि आरक्षण का आधार छुआछूत है। कोई इसे कैसे बदल सकता है। क्रीमीलेयर व्यक्ति पर लागू होता है जाति पर नहीं। ये लेखक के निजी विचार हैं।
डॉ. सुनील कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर
एक तरफा प्यार में पागल प्रेमी ने प्रेमिका की मां को पेट्रोल से जिन्दा जलाया,मौत
#एक तरफा प्यार में पागल प्रेमी ने प्रेमिका की मां को पेट्रोल से जलाया ,ईलाज के दौरान मौत
JAUNPUR CRIME NEWS जौनपुर। सरपतहां थाना क्षेत्र के बसिरहां गांव में मकान के अंदर सो रही महिला पर तरफा प्यार में पागल एक युवक ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। घायल महिला प्रविदा बिन्द (40) की शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गयी। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव के ही आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। घटना बुधवार की रात करीब तीन बजे की है। सूचना पर एसपी ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। बसिरहा गांव निवासी प्रविदा (40) पत्नी लालजी बिंद घर के भीतर सोई हुई थी। रात में छत के रास्ते स्थानीय थाना क्षेत्र के मटियरा गांव निवासी विनय कुमार मकान के भीतर घुस गया। वहां पर सो रही प्रविदा के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और मौके से फरार हो गया। आग लगते ही महिला बचाव के लिए चिल्लाती हुई घर के बाहर निकली।
मां की आवाज सुनकर बेटे की नींद खुल गई तो देखा कि मां आग की लपटों से घिरी थी। उसने आनन-फानन में मां के ऊपर कंबल डालकर आग बुझाया, लेकिन तब तक महिला काफी झुलस चुकी थी। पीड़िता ने बताया कि 10 दिन पहले एक तरफा प्यार में पागल विनय बिन्द उनके घर में आकर पकड़ा गया था, इसके बाद विवाद हुआ था। वह अपने ननिहाल में आकर रहता है। पीड़ित महिला का पति रोजी रोटी के सिलसिले में मुंबई में रहता है। घटना के वक्त घर में महिला के अलावा उसका एक बेटा ही मौजूद था। घटना की सूचना पुलिस को देने के साथ ही उसे इलाज के लिए सीएचसी सुइथाकला ले जाया गया, जहां प्रविदा की गंभीर हालत को देखकर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जौनपुर। थाना सरपतहाँ अन्तर्गत ग्राम बसिरहा में एक व्यक्ति द्वारा महिला पर पेट्रोल छिड़ककर जला देने की घटना में तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। आज महिला की उपचार के दौरान मृत्यु हो गयी क्षेत्राधिकारी शाहगंज अजीत सिंह चौहान pic.twitter.com/LyZm4SW2TC
घायल महिला की गंभीर स्थिती होने के कारण वाराणसी रेफर कर दिया गया था। घटना की सूचना मिलते हीं थानाध्यक्ष अरविंद सिंह मौके पर पहुंच गए और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी युवक को गिरफ्तार करने के साथ ही उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दिए। क्षेत्राधकारी शाहगंज अजीत सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपी थाना क्षेत्र के मटियरा निवासी विनय कुमार बिन्द के खिलाफ मुकदमा दर्जकर उसे गुरुवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया ।अभियुक्त के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है ।
खेतासराय के मानी कलां गांव में कारपेंटर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या
# खेतासराय के मानी कलां गांव में कारपेंटर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या,खुशियां मातम में तब्दील
खेतासराय (जौनपुर) स्थानीय थाना क्षेत्र के मानी कलां गांव में नागपंचमी के अवसर पर लोग अपने परिवार के बीच खुशी मानते है। लेकिन क्षेत्र स्थित गांव मानीकलां में एक परिवार की खुशियां मातम में तब्दील हो गयी। दरअसल उक्त गांव निवासी 28 वर्षीय कारपेंटर अनुराग उर्फ मन्टू विश्वकर्मा पुत्र पारसनाथ शुक्रवार की सुबह कमरे में लगा पंखा में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। जिसके पीछे का कारण पारिवारिक कलह बताया जाता है। बताया जाता है कि मृतक अनुराग की पत्नी गुड़िया देवी से किसी बात को लेकर हुए अनबन में अनुराग अपनी जीवन लीला समाप्त करने की निर्णय पर पहुँच गया और घर के कमरे में लगा पंखा में फांसी का फंदा लगाकर मौत को गले लगा लिया।
मृतक की माता निर्मला देवी गांव के पोखरे के पास नागपंचमी की पूजा करने गयी थी। वहां से आने के बाद बहु गुड़िया दरवाजे के पास बैठकर आवाज लगा रही थी। कई बार आवाज लगाने के बाद दरवाजा अंदर से नहीं खुला तो आस-पास के लोग एकत्र हो गए और दरवाजा को तोड़ा गया। पंखे के सहारे अनुराग को लटकते देख लोग दंग रह गए तथा मां, बहन दहाड़ मार कर रोने लगी। स्वजनों की मदद से आनन-फानन निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहाँ डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मृतक अनुराग अपने पीछे अपनी पत्नी गुड़िया व 8 वर्षीय पुत्री लबली और 6 बर्षीय पुत्र अरुण को छोड़ गया। मृतक के पिता पारसनाथ रोजी-रोटी के सिलसिले में मुंबई रहते है। सूचना के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शहीदों के सम्मान में पूर्वांचल विश्वविद्यालय में निकला साइकिल मार्च
#शहीदों के सम्मान में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में निकाला गया साइकिल मार्च
जौनपुर। शहीदों के सम्मान मे शिलापट्ट पर कुलपति ने अर्पित की पुष्पांजलि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय सेवा योजना परिसर इकाई द्वारा काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर शुक्रवार को मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने शहीद शिलापट पर पुष्पांजलि अर्पित कर काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर शहीदों की वीरता और उनके द्वारा दिए गए बलिदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन स्वतंत्रता के प्रति हमारे वीर क्रांतिकारियों की अटूट प्रतिबद्धता और बलिदान की प्रतीक थी। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम हिस्सा है, जिसने हमें आजादी की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शहीदों के सम्मान में इस महोत्सव का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस संघर्ष की गाथा से अवगत कराना और उन्हें राष्ट्रप्रेम की भावना से प्रेरित करना है। साथ ही साथ शहीदों की याद में एक विशेष साइकिल मार्च का भी आयोजन किया गया। साइकिल मार्च का उद्देश्य न केवल शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करना था, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना और स्वतंत्रता संग्राम की भावना को जीवित रखना भी था।
फोटो – शहीदों के सम्मान मे शिलापट्ट पर पुष्पांजलि अर्पित करती कुलपति बंदना सिंह
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक विनोद सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज हम उन वीरों को नमन करते है जिन्होंने अपने जीवन को राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। उनके सपनों को साकार करने के लिए हमें एकजुट होकर सशक्त भारत का निर्माण करना होगा। शहीदों के सम्मान में काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई एवं क्विज़ एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। क्विज़ एवं निबंध प्रतियोगिता में 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इसके साथ ही डॉ. नितेश जायसवाल ने काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित आलेख का वाचन कर छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.अजय द्विवेदी, निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार यादव, प्रो.आचार्य विक्रम देव, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो.सौरभ पाल, प्रो.रजनीश भाष्कर, काकोरी ट्रेन एक्शन के नोडल अधिकारी प्रो.गिरिधर मिश्र,डॉ. पुनीत कुमार धवन एवं डॉ. शशिकांत यादव, हर घर तिरंगा के नोडल अधिकारी प्रो. मनोज मिश्र,उपकुलसचिव अमृत लाल, डॉ. श्याम कन्हैया, डॉ. मनोज कुमार पांडेय,डॉ. नीरज अवस्थी,डॉ.सुजीत चौरसिया, डॉ. संदीप वर्मा,डॉ. विशाल यादव, डॉ. ज्ञानेंद्र पाल,डॉ. लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, डॉ. प्रमोद कुमार कौशिक, डॉ.इंद्रेश गंगवार, नीरज कुमार आदि एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
प्रयागराज में अगस्त क्रान्ति पर शहीदों के नाम जलाई गई रौशनी
#प्रयागराज में अगस्त क्रान्ति पर शहीदों के नाम एक रौशनी जलाई गई
प्रयागराज। कई साल बाद आज 9 अगस्त को अगस्त क्रांति के शहीदों को नमन करने के लिए शहीदवॉल पर “एक रोशनी शहीदों के नाम” जलाई गई। भारत माता की जय के नारे के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। उल्लेखनीय की शहीदवॉल सुंदरीकरण योजना के तहत स्मार्ट सिटी इसका सुंदरीकरण कर रहा है।
किंतु कार्य लगातार विलंब हो रहा है। भारत भाग्य विधाता संस्था ने पूर्व की तरह यहां कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय किया और आज शहीदों के नाम रोशनी की गई। साथ ही काकोरी एक्शन पर भी चर्चा की गई।कार्यक्रम में ज्ञानेश्वर त्रिपाठी, दिनेश तिवारी, विनीत श्रीवास्तव मो आमिर, राहुल दुबे,अनुराग द्विवेदी, अमित उपाध्याय श्यामू कुशवाहा प्रमुख रूप से उपस्थित थे
गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर में मनाया गया काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस
#जौनपुर के गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर में मनाया गया काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस
Kakori Train Action Day celebrated at Gandhi Memorial PG College Samodhpur jaunpur
जौनपुर। गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर में शुक्रवार को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस’ मनाया गया । इस अवसर पर छात्राओं ने रंगोली बनाया । रंगोली के बाद निबंध लेखन प्रतियोगिता हुई।प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। ‘काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस’ पर प्राचार्य प्रोफेसर रणजीत कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में संगोष्ठी का आयोजन हुआ।संगोष्ठी में प्रोफेसर पांडेय ने काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े क्रांतिकारियों की भूमिका के बारे में बताया।उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में अलग-अलग क्षेत्र के लोग जुड़े थे लेकिन उनका मुख्य ध्येय भारत की स्वाधीनता थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. अरविंद सिंह ने इस घटना के महत्व को बताया । उन्होंने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना ने अंग्रेजों को भारतीयों को अधिकार देने के संदर्भ में विचार करने पर विवश किया ।
विशिष्ट वक्त प्रोफेसर राकेश कुमार यादव ने काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना पर विस्तृत प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि भारत की स्वाधीनता के संग्राम में काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। 8 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर में राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के घर पर हुई एक इमर्जेन्सी मीटिंग में निर्णय कर योजना बनी। 9अगस्त,1925 को आठ डाउन सहारनपुर लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को काकोरी स्टेशन पर जंजीर खींचकर रोककर राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने 9अन्य सहयोगियों के साथ सरकारी खजाने को लूट लिया। बाद में अंग्रेजी सत्ता उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के कुल ४० क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने व यात्रियों की हत्या करने का प्रकरण चलाया। जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह को मृत्यु-दण्ड (फाँसी की सजा) सुनायी गयी। इस प्रकरण में १६ अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम ४ वर्ष की सजा से लेकर अधिकतम काला पानी (आजीवन कारावास) तक का दण्ड दिया गया था।राहुल भेरामोरे जिसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह को फाँसी की सजा सुनायी गयी। इस प्रकरण में १६ अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम ४ वर्ष की सजा से लेकर अधिकतम आजीवन कारावास तक का दण्ड दिया गया था। इन महान सेनानियों को प्रत्येक विद्यार्थी को जानना चाहिए।
सहायक आचार्य सत्य प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों के साथ काकोरी ट्रेन एक्शन के शताब्दी वर्ष के बारे में चर्चा की।संगोष्ठी का संचालन डॉ अविनाश कुमार वर्मा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ अवधेश कुमार मिश्रा ने किया । इस अवसर पर भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो लक्ष्मण सिंह,डॉ नीलमणि सिंह, डॉ पंकज सिंह, डॉ आलोक प्रताप सिंह बिसेन, डॉ वंदना तिवारी, जितेंद्र सिंह, विकास कुमार यादव, नीलम सिंह, जितेंद्र कुमार, कार्यालय अधीक्षक बिन्द प्रताप सिंह, अखिलेश सिंह, डॉ संदीप कुमार सिंह व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे ।
#Jaunpur: Bala Lakhandar Yadav shooting case accused absconding from civil court
जौनपुर दीवानी न्यायालय परिसर से पेशी पर आये हत्या का आरोपी कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार । सपा सभासद और जमीन का कारोबार करने वाला बाला लखन्दर हत्या कांड आज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। एक फरवरी 2021 की रात 8 बजे अज्ञात बदमाशो ने सिटी स्टेशन के प्लेट फार्म नंबर 1 पर सैदनपुर गांव निवासी बाला लखन्दर को गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था।
परिजनों की तहरीर पर उस समय मडियाहू ब्लाक प्रमुख समेत तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी ।
जीआरपी पुलिस की जांच में बाला यादव के हत्या करने वालो सैदनपुर गांव निवासी ,ओम चन्द्र गुप्ता उर्फ पवन , मडियाहू थाना क्षेत्र के उमेश गौड़ रामपुर नदी गांव निवासी रितेश सिंह, व शोलापुर जनपद , महाराष्ट्र के जयदीप प्रकाश गायक बाड़ को 10 फरवरी 2021 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आज जयदीपप्रकाश गायकवाड़ को दीवानी न्यायालय में पेशी पर लाया गया था।
क्षेत्राधिकारी नगर, देवेश सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आज 9 अगस्त को थाना जीआरपी के मुजरिम जयदीपप्रकाश गायकवाड़ को दीवानी पेशों के लिए लाया गया था , पुलिस को चकमा देकर मौके का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। उसके छानबीन के लिए पुलिस की कई टीमो को लगा दिया गया है। संबंधित कैदी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जाएगी।
#Time to apply for marriage grant is 90 days before and 90 days after the marriage.
shaadee anudaan ke lie shaadee se 90 din poorv evan 90 din baad tak milata hai aavedan ka samay
जौनपुर । गरीबी रेखा के नीचे यापन करने वाले परिवार की बेटी की शादी के लिए गुरुवार को शादी अनुदान को लेकर मुख्य विकास अधिकारी साईं तेजा सीलम की अध्यक्षता में अन्य पिछड़ा वर्ग (अल्पसंख्यक पिछड़े वर्ग को छोड़कर) शादी अनुदान स्वीकृति समिति की बैठक आयोजित हुई बैठक में जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि पिछड़ी जाति शादी अनुदान योजना पूर्णतया कम्प्यूटराइज एवं ऑनलाइन संचालित की जा रही है, जिसमें आवेदक एवं उसकी पुत्री का आधार प्रमाणिकरण (ई0के0वाई0सी) अनिवार्य कर दिया गया है। इस योजनान्तर्गत वह आवेदक पात्र है जिनके पुत्री की शादी 01 अप्रैल, 2024 के बाद सम्पन्न हुई है। आवेदक शादी की तिथि से 90 दिन पूर्व एवं 90 दिन बाद तक शादी अनुदान पोर्टल पर आवेदन पत्र भर सकते है। ग्रामीण एवं शहरी दोनो क्षेत्रो के आवेदक की वार्षिक आय रू0 1,00,000.00 से अधिक नही होनी चाहिए। कन्या की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के उपरान्त समस्त सलग्नकों सहित आवेदन पत्र ग्रामीण क्षेत्रों का सम्बन्धित विकाखण्ड एवं शहरी क्षेत्रों का सम्बन्धित तहसील कार्यालय पर जमा किया जाता है, जहां से सत्यापन उपरान्त आवेदन ऑनलाइन फारवर्ड किया जाता है।
शादी अनुदान योजना के अन्तर्गत सम्बन्धित मद में उपलब्ध धनराशि के सापेक्ष पात्र अभ्यार्थियों में से निराश्रित महिला/दिव्यांग की पुत्रियों की शादी के मामलों में वरीयता दिये जाने के साथ-साथ ‘‘प्रथम आवत प्रथम पावत’’ के अनुसार सहायता स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था है। आवेदक के बैंक खाते का पीएफएमएस रिस्पांस मुख्यालय से प्राप्त होने के उपरान्त धनराशि वितरण की कार्यवाही प्रारम्भ की जाती है। शादी अनुदान योजनान्तर्गत धनराशि रू0 20,000.00 प्रति लाभार्थी कोषागार नेफ्ट द्वारा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में प्रेषित की जाती है।
शादी अनुदान योजना के अन्तर्गत अब तक शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों द्वारा विवाह अनुदान पोर्टल पर आंनलाइन किये गये आवेदन पत्रों एवं उसके सापेक्ष अग्रेतर कार्यवाही के सम्बन्ध में समिति को अवगत कराया गया कि, शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों द्वारा विवाह अनुदान पोर्टल पर क्रमशः कुल 2121 आवेदन अब तक किये गये हैं जिसके सापेक्ष बी0डी0ओ0/एस0डी0एम0 के स्तर से सत्यापन के पश्चात् क्रमशः 1032 आवेदन पत्रों को पात्र/सही पाते हुये पोर्टल पर डिजिटली लॉक किया गया है। समिति के समक्ष 693 शादी अनुदान से सम्बन्धित लाभार्थियों के आवेदन पत्रों पर विचार किया गया समिति के द्वारा सभी 693 लाभार्थियों को अनुदान दिये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रति लाभार्थी को रू0 20,000.00 की अनुदान धनराशि प्राप्त होगी इस प्रकार 693 लाभार्थियों पर रू0 138.60 लाख व्यय होगा।